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CPI का नया फॉर्मूला आया, अब पेट्रोल-डीजल तय करेंगे महंगाई

 
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New Delhi : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा की कीमतों में तेजी का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ICICI Bank की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में देश की खुदरा महंगाई दर करीब 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इससे रोजमर्रा की चीजों और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

रिपोर्ट में बदला महंगाई का अनुमान

बैंक ने महंगाई को लेकर अपने पहले के 3.9 प्रतिशत कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के अनुमान में बदलाव किया है। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें इस बदलाव की मुख्य वजह हैं। ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन, उत्पादन और अन्य सेवाओं पर भी पड़ता है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत में महंगाई अभी भी नियंत्रण में रहने की संभावना है। पहले CPI का अनुमान करीब 2.1 प्रतिशत बताया गया था, लेकिन नई गणना पद्धति के बाद इसमें संशोधन किया गया है।

नई सीरीज में बदला महंगाई का गणित

महंगाई मापने के तरीके में बदलाव के बाद उपभोक्ता बास्केट में भी बदलाव किया गया है। नई सीरीज के अनुसार खाने-पीने की चीजों का हिस्सा घटाकर 36.8 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले की तुलना में करीब 9.1 प्रतिशत कम है। वहीं पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का वेटेज बढ़ा दिया गया है, जिससे ईंधन की कीमतों का असर महंगाई पर अब ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से CPI पर सीधे 40-45 बेसिस प्वाइंट्स और कुल मिलाकर 50-60 बेसिस प्वाइंट्स तक असर पड़ सकता है। यानी अब तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव महंगाई पर पहले से ज्यादा तेज़ी से पड़ेगा।

RBI ने भी बदला अनुमान

महंगाई को लेकर RBI ने भी अपने अनुमान में बदलाव किया है। फरवरी में हुई मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI महंगाई के आंकड़ों को संशोधित किया गया। नए अनुमान के मुताबिक FY27 की पहली तिमाही में महंगाई करीब 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से थोड़ा अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं, तो इसका सीधा असर भारत में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।