अब एथेनॉल से उड़ेंगे हवाई जहाज! साउथ कोरिया के फैसले से ग्रीन एविएशन की नई शुरूआत
Seoul/New Delhi : वैश्विक स्तर पर प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में दक्षिण कोरिया ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विमानन क्षेत्र में एथेनॉल आधारित सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक जेट ईंधन पर निर्भरता कम करना और विमानों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को घटाना है।
क्या है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल?
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) पारंपरिक पेट्रोलियम आधारित जेट फ्यूल की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। इसे एथेनॉल, कृषि अवशेष, इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल और अन्य जैविक स्रोतों से तैयार किया जा सकता है। इस ईंधन के उपयोग से विमानों से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
दक्षिण कोरिया की नई योजना
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोरिया सरकार ने विमानन क्षेत्र में SAF के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत एथेनॉल आधारित ईंधन के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा और एयरलाइंस को धीरे-धीरे पारंपरिक जेट फ्यूल के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल ईंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
भारत भी कर रहा है तैयारी
भारत भी जैव ईंधन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending Programme) को बढ़ावा दे रही है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके। इसके साथ ही देश में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के विकास और उत्पादन पर भी शोध और तकनीकी कार्य जारी है।
पूरी तरह बदलना अभी आसान नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल पारंपरिक जेट फ्यूल को पूरी तरह SAF से बदलना संभव नहीं है। विमान इंजनों की तकनीकी आवश्यकताओं, ईंधन आपूर्ति नेटवर्क और उत्पादन क्षमता जैसी कई चुनौतियां अभी मौजूद हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में पारंपरिक जेट फ्यूल के साथ SAF का मिश्रित उपयोग किए जाने की संभावना अधिक है।
ग्रीन एविएशन की दिशा में दक्षिण कोरिया का यह कदम भविष्य में वैश्विक विमानन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।
