Investment का नया ट्रेंड! FD, सोना और प्रॉपर्टी के साथ इन Assets में पैसा लगा रहे भारतीय
Best Investment Options in India 2026: लंबे समय से भारतीय परिवारों के लिए पैसा सुरक्षित रखने और संपत्ति बनाने के प्रमुख विकल्प फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सोना, शेयर बाजार और रियल एस्टेट रहे हैं। लेकिन निवेश का तरीका अब धीरे-धीरे बदल रहा है। खासकर युवा और ज्यादा जागरूक निवेशक अपने पोर्टफोलियो में पारंपरिक निवेश के साथ नए और वैकल्पिक एसेट्स को भी जगह दे रहे हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि FD, सोना या प्रॉपर्टी की अहमियत खत्म हो गई है। बदलाव यह है कि निवेशक अब अपना पूरा पैसा किसी एक एसेट में लगाने के बजाय डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। प्राइवेट क्रेडिट, स्ट्रक्चर्ड डेट, इंटरनेशनल निवेश, रियल एसेट्स और क्रिप्टो जैसे विकल्प इसी बदलती सोच का हिस्सा हैं।
35 साल से कम उम्र के निवेशकों में बढ़ी नए एसेट्स की दिलचस्पी
CoinDCX की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और क्रिप्टो बिजनेस हेड मिनल ठुकराल के मुताबिक, खासकर 35 साल से कम उम्र के भारतीय निवेशक ग्लोबल और हाई-ग्रोथ एसेट क्लास में एक्सपोजर चाहते हैं। इसी वजह से क्रिप्टो भी उनके निवेश पोर्टफोलियो में चर्चा का हिस्सा बन रहा है।
उनके अनुसार, क्रिप्टो को लेकर निवेशकों की सोच भी पिछले कुछ वर्षों में बदली है। पहले इसे काफी हद तक सट्टेबाजी या मेम कॉइन से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब कुछ निवेशक Bitcoin और Ethereum जैसे स्थापित डिजिटल एसेट्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों में सीमित निवेश की रणनीति अपना रहे हैं।
क्या FD, सोना और प्रॉपर्टी की चमक फीकी पड़ रही है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि पारंपरिक निवेश खत्म हो रहे हैं। FD अभी भी सुरक्षा और निश्चित रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है। सोने को लंबे समय से सुरक्षा और वैल्यू स्टोर के तौर पर देखा जाता है, जबकि प्रॉपर्टी भारतीय परिवारों के लिए लंबे समय की संपत्ति बनाने का प्रमुख जरिया रही है।
बदलाव सिर्फ इतना है कि निवेशकों के पास अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा विकल्प उपलब्ध हैं। इसलिए कई लोग अलग-अलग एसेट्स को अपने रिस्क, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से पोर्टफोलियो में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
अमीर निवेशकों की नजर Private Credit और Structured Debt पर
वेल्थी निवेशकों और फैमिली ऑफिस के बीच भी पारंपरिक निवेश से आगे जाने की दिलचस्पी बढ़ी है। Arbour Investments के फाउंडर चिराग मेहता के मुताबिक, हाई-नेट-वर्थ निवेशक अब Private Credit, Structured Debt और Real Assets जैसे विकल्पों की तरफ देख रहे हैं।
उन्होंने Alternative Investment Funds यानी AIFs की बढ़ती लोकप्रियता का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, पिछले एक दशक में AIFs के जरिए जुटाई गई प्रतिबद्धताएं कई गुना बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी हैं। Category II AIFs में प्राइवेट क्रेडिट और रियल एस्टेट जैसी रणनीतियां शामिल हैं।
Private Credit क्यों बन रहा है नया विकल्प?
Private Credit में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की एक वजह यह है कि कुछ संरचित निवेश विकल्पों में तय अवधि और कूपन के साथ एसेट-बेस्ड सिक्योरिटी मिल सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ निवेश संस्थाएं Non-Convertible Debentures (NCDs) और खासकर रियल एस्टेट से जुड़े स्ट्रक्चर्ड इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस कर रही हैं। इन्हें कुछ निवेशक FD और इक्विटी फंड के बीच के विकल्प के रूप में देखते हैं। हालांकि, ऐसे निवेश में जोखिम को समझना बेहद जरूरी है और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।
Crypto में भी बदल रहा है निवेश का तरीका
क्रिप्टो में निवेश करने का तरीका भी धीरे-धीरे बदलने की बात सामने आई है। कुछ निवेशक एक साथ बड़ी रकम लगाने या बाजार का सही समय पकड़ने के बजाय छोटी रकम और नियमित निवेश के जरिए डिजिटल एसेट्स में एक्सपोजर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस रणनीति की तुलना म्यूचुअल फंड के SIP मॉडल से की जा रही है। हालांकि, क्रिप्टो अभी भी अत्यधिक जोखिम वाला एसेट क्लास है और इसमें निवेश से पहले जोखिमों तथा लागू नियमों को समझना जरूरी है।
Tokenised Real-World Assets पर भी नजर
निवेश की दुनिया में एक और उभरता हुआ क्षेत्र Tokenised Real-World Assets है। इसके जरिए रियल एस्टेट, कमोडिटी या रिसीवेबल्स जैसे वास्तविक एसेट्स को ब्लॉकचेन आधारित टोकन के रूप में पेश करने की संभावना है।
इस मॉडल में छोटे निवेशकों को किसी बड़े एसेट में आंशिक हिस्सेदारी का अवसर मिल सकता है और भविष्य में इसकी लिक्विडिटी भी बढ़ सकती है। हालांकि, इस क्षेत्र के विस्तार में रेगुलेटरी क्लैरिटी की बड़ी भूमिका होगी।
रियल एस्टेट भी बदल रहा है निवेश का तरीका
रियल एस्टेट में भी निवेश सिर्फ सीधे जमीन या मकान खरीदने तक सीमित नहीं रह गया है। वैकल्पिक निवेश फंड के जरिए डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और प्राइवेट इक्विटी रियल एस्टेट में निवेश के विकल्प भी सामने आ रहे हैं।
रिपोर्ट में एक प्रस्तावित Category II AIF के जरिए हाई-ग्रोथ मार्केट में डेवलपमेंट आधारित और प्राइवेट-इक्विटी रियल एस्टेट अवसरों में निवेश की योजना का भी उल्लेख है। इसमें मिड-टू-हाई-टीन्स IRR का लक्ष्य बताया गया है, लेकिन यह अनुमानित लक्ष्य है, गारंटीड रिटर्न नहीं।
निवेश का सबसे बड़ा मंत्र- Diversification
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निवेश के ज्यादा विकल्प उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं है कि निवेशक ज्यादा जोखिम लेना शुरू कर दें। सबसे जरूरी बात Diversification यानी अलग-अलग एसेट्स में संतुलित निवेश है।
हर व्यक्ति के लिए वैकल्पिक निवेश का एक जैसा प्रतिशत तय नहीं किया जा सकता। निवेश का फैसला व्यक्ति के वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की अवधि, पैसों की जरूरत और मौजूदा पोर्टफोलियो को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
निवेशकों को सोशल मीडिया के ट्रेंड या तेजी से मिलने वाले रिटर्न के लालच में पैसा लगाने से बचना चाहिए। किसी भी नए एसेट में निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा कौन मैनेज कर रहा है, निवेश कितना सुरक्षित है और खराब प्रदर्शन की स्थिति में निवेशक की स्थिति क्या होगी।
आने वाले समय में एक नहीं, कई एसेट्स से बनेगी Wealth
बदलती निवेश आदतों से एक बात साफ है कि भारतीय निवेशक अब सिर्फ एक पसंदीदा एसेट पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग निवेश विकल्पों को मिलाकर पोर्टफोलियो बनाने की तरफ बढ़ रहे हैं।
FD और सोना जैसे पारंपरिक विकल्प अपनी जगह बने रहेंगे, लेकिन इनके साथ डेट, इक्विटी, इंटरनेशनल एसेट्स, रियल एसेट्स और कुछ निवेशकों के लिए क्रिप्टो जैसे विकल्प भी पोर्टफोलियो का हिस्सा बन सकते हैं। आखिरकार सही निवेश वही है जो व्यक्ति के लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समय सीमा के अनुरूप हो।
