Budget 2026 : स्वास्थ्य से शिक्षा तक, निर्मला सीतारमण से मिडिल क्लास और युवाओं को कई बड़ी उम्मीदें
Jan 31, 2026, 10:15 IST
WhatsApp Channel
Join Now
Facebook Profile
Join Now
Instagram Profile
Join Now
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026-27 पेश करेंगी। इससे पहले शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों को लेकर देशभर में बड़ी अपेक्षाएं जताई जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि इस बार बजट में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और कौशल आधारित सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 99,858.56 करोड़ रुपये किया गया था, जबकि 2024-25 में यह 90,958.63 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ती आबादी और महंगे इलाज के बीच आम आदमी पर पड़ने वाले स्वास्थ्य खर्च को कम करने के लिए और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख मांगें
आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी. आर. सोदानी का कहना है कि देश में मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर निवेश जरूरी है। उन्होंने बताया कि मानव संसाधन, डिजिटल हेल्थ और बुनियादी ढांचे को सशक्त किए बिना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है। उनके अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य खर्च बढ़ाकर उसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि जेब से होने वाले इलाज के खर्च को कम किया जा सके। साथ ही प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देकर रिसर्च एंड डेवलपमेंट को भी नई गति दी जा सकती है।
शिक्षा क्षेत्र से भी बड़ी अपेक्षाएं
शिक्षा की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में इसके लिए 1,28,650.05 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो पिछले वर्ष से करीब 6.5 प्रतिशत अधिक था। इसमें स्कूल शिक्षा के लिए 78,572 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 50,078 करोड़ रुपये शामिल रहे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रिसर्च के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।
बीआईएमटेक, ग्रेटर नोएडा के डिप्टी डायरेक्टर और डीन (अकादमिक्स) पंकज प्रिया का कहना है कि शिक्षा सुधार केवल सिलेबस तक सीमित नहीं होना चाहिए। जब केंद्र सरकार स्किलिंग को राष्ट्रीय एजेंडा बना रही है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल राज्यों पर नहीं छोड़ी जा सकती।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा में पाठ्यक्रमों को इंडस्ट्री 4.0, जेनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के अनुरूप ढालना बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इस दिशा में बदलाव का समर्थन करती है और 2025 तक कम से कम 50 प्रतिशत छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य रखती है।
अब गुणवत्ता पर हो फोकस
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के मुताबिक, बीते आठ वर्षों में कॉलेजों की संख्या में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और सकल नामांकन अनुपात 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 28.4 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब अगला कदम केवल पहुंच बढ़ाने तक सीमित न रहकर शिक्षा की गुणवत्ता, शोध क्षमता और रोजगारोन्मुख परिणामों पर केंद्रित होना चाहिए।
जानकारों के अनुसार, बजट 2026 भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाने का अहम मौका हो सकता है। यदि नवाचार, उद्यमिता और अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर फोकस किया गया, तो इसका सीधा लाभ युवाओं और देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा।
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 99,858.56 करोड़ रुपये किया गया था, जबकि 2024-25 में यह 90,958.63 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ती आबादी और महंगे इलाज के बीच आम आदमी पर पड़ने वाले स्वास्थ्य खर्च को कम करने के लिए और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख मांगें
आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी. आर. सोदानी का कहना है कि देश में मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर निवेश जरूरी है। उन्होंने बताया कि मानव संसाधन, डिजिटल हेल्थ और बुनियादी ढांचे को सशक्त किए बिना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है। उनके अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य खर्च बढ़ाकर उसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि जेब से होने वाले इलाज के खर्च को कम किया जा सके। साथ ही प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देकर रिसर्च एंड डेवलपमेंट को भी नई गति दी जा सकती है।
शिक्षा क्षेत्र से भी बड़ी अपेक्षाएं
शिक्षा की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में इसके लिए 1,28,650.05 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो पिछले वर्ष से करीब 6.5 प्रतिशत अधिक था। इसमें स्कूल शिक्षा के लिए 78,572 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 50,078 करोड़ रुपये शामिल रहे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रिसर्च के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।
बीआईएमटेक, ग्रेटर नोएडा के डिप्टी डायरेक्टर और डीन (अकादमिक्स) पंकज प्रिया का कहना है कि शिक्षा सुधार केवल सिलेबस तक सीमित नहीं होना चाहिए। जब केंद्र सरकार स्किलिंग को राष्ट्रीय एजेंडा बना रही है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल राज्यों पर नहीं छोड़ी जा सकती।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा में पाठ्यक्रमों को इंडस्ट्री 4.0, जेनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के अनुरूप ढालना बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इस दिशा में बदलाव का समर्थन करती है और 2025 तक कम से कम 50 प्रतिशत छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य रखती है।
अब गुणवत्ता पर हो फोकस
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के मुताबिक, बीते आठ वर्षों में कॉलेजों की संख्या में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और सकल नामांकन अनुपात 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 28.4 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब अगला कदम केवल पहुंच बढ़ाने तक सीमित न रहकर शिक्षा की गुणवत्ता, शोध क्षमता और रोजगारोन्मुख परिणामों पर केंद्रित होना चाहिए।
जानकारों के अनुसार, बजट 2026 भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाने का अहम मौका हो सकता है। यदि नवाचार, उद्यमिता और अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर फोकस किया गया, तो इसका सीधा लाभ युवाओं और देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा।
