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बदलते भारत में बचत का बदलता स्वरुप

 
बदलते भारत में बचत का बदलता स्वरुप
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मिथिलेश कुमार पाण्डेय ( लेखक पूर्व सहायक महाप्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा एवं आर्थिक विश्लेषक हैं )

भविष्य की चिंता मानव स्वाभाव का अभिन्न अंग रहा है और सुरक्षा के लिए संचय की प्रवृति हमेशा से मनुष्य के साथ रही है l हालाँकि अर्थ की उप्लब्द्धता सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं हो सकती है फिर भी सुरक्षा के संसाधनों के लिए अर्थ की जरुरत अपरिहार्य है l अंग्रेजी में एक कहावत है “ Make Hay while Sun Shines” जिसका भी निहितार्थ है कि साधन सम्पन्नता के दौरान ही भविष्य की तैयारी करनी चाहिए l परंपरागत रूप से विशेषतः गरीब समाज में बचत की प्रवृति ज्यादा रही है भले ही बचत की मात्रा कम हो l

बचत के माध्यम अलग अलग रहे हैं और जैसे जैसे वित्तीय व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और ज्यादा आबादी में वित्तीय साक्षरता का प्रसार हुआ है लोग बैंक या अन्य वित्तीय उत्पाद की ओर जागृत हुए है और इनका प्रयोग करके बचत कर रहे हैं l बचत के मामले में धन की सुरक्षा के साथ साथ धन में वृद्धि की भी आस रहती है l बैंको का राष्ट्रीयकरण और जनधन योजना ने वित्तीय समावेशन में व्यापक प्रभाव छोड़ा है और अब देश की लगभग पूरी वयस्क आबादी बैंकिंग और वित्तीय सेवा के दायरे में आ गया है l

भारत में आम जनता का बैंको पर अटूट विश्वास है अपने धन की सुरक्षा के लिए और जो भी व्याज मिल जाता है उससे वे संतुष्ट हो जाते हैं l आम जनता का यही विश्वास भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत है l वित्तीय साक्षरता के आभाव में अन्य वित्तीय उत्पाद के बारे आम जनता अनभिज्ञ रही और बैंक एक मात्र साधन रहे बचत करने के लिए l बैंको में जमा के 3 मुख्य श्रेणी है : पहला है चालू खाता जो आम तौर पर व्यापार के उद्देश्य से खोले जाते हैं और जिनपर कोई व्याज नहीं मिलता है दूसरा है बचत खाता जिसमे बहुत नाम मात्र का व्याज मिलता है (2%-3% लगभग ) और तीसरा है सावधि जमा खाता जिसपर सबसे ज्यादा व्याज ( एक वर्ष से ज्यादा अवधि के लिए वर्तमान में 7% से 8.5% के बीच लगभग ) l अपने निवेश पर मिलनेवाला वास्तविक return व्याजदर में से मुद्रास्फीति को घटा करके माना जाता है l

वित्तीय साक्षरता ने आम जनता को निवेश के उन अवसरों से परिचित कराया है जो कि मुद्रास्फीति के प्रभाव से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है जिसमे से आजकल म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश के लिए लोग प्रेरित हो रहे हैं और शायद यही कारण है कि बैंकों में बचत खाते की हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है l 2023 में बैंको के कुल जमा में बचत खाते की ह्स्सेदारी 33% थी जो कि 2024 में 30.8% रही और 2025 में 28.9% हो गयी l वित्तीय साक्षरता और टेक्नोलॉजी की उप्लाबद्धता ने म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश को आसान बना दिया है l उपलब्द्ध आंकड़ो के अनुसार मार्च 2025 में बैंकों में 65.8 लाख करोड़ रुपये बचत खाते में जमा है जो कि खाताधारकों को नकारात्मक Return दे रहे हैं l कम लगत वाले बचत खाते बैंको की लाभप्रदता के लिए तो अच्छे हैं पर जमाकर्तायों के लिए नहीं l

कुछ आंकड़ो के माध्यम से अपने देश में बचत प्रवृति को समझने का प्रयास करते हैं l यह तो सामान्य रूप से दृष्टिगत होता है कि उपभोक्तावादी प्रवृति के कारण घरेलु बचत कम हो रही है l दुनिया के युवाओं में BNPL ( Buy Now Pay Later) की सोच विक्सित हो रही है और उपभोग के लिय क्रेडिट कार्ड, व्यक्तिगत ऋण, EMI वाले ऋण काफी लिए जा रहे है l समझने के लिए बैंक डिपाजिट और म्यूच्यूअल फण्ड में निवेशित राशि के कुछ आंकडे देखते हैं :

वर्ष बैंक डिपाजिट म्यूचुअल फंड (AUM) म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी (%)
2019 126 लाख करोड़ रुपये 24 लाख करोड़ रुपये 19.05%
2020 137 लाख करोड़ रुपये 22 लाख करोड़ रुपये 16.05%
2022 170 लाख करोड़ रुपये 38 लाख करोड़ रुपये 22.35%
2024 213 लाख करोड़ रुपये 53 लाख करोड़ रुपये 24.88%

उपरोक्त टेबल को देखने से स्पष्ट है कि 19-20 में बैंक डिपाजिट में 8.73% की वृद्धि हुई जबकि म्यूच्यूअल फण्ड में 8.33% की गिरावट दर्ज की गयी l 20-22 के काल खंड में बैंक डिपाजिट 24.08% बढे जबकि म्यूच्यूअल फण्ड में 72.73% की वृद्धि हई और 22-24 के काल खंड में जहाँ बैंक डिपाजिट 25.29% बढे वहीँ म्यूच्यूअल फण्ड 39.47% बढे l कोरोना महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया में एक अजीब सी अनिश्चयता व्याप्त थी तभी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश की वृद्धिका दर बैंक डिपाजिट के वृद्धि दर से कम था वर्ना शेष समय में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश लगातार बढ़ता रहा है l

AMFI (Association of Mutual Funds of India) के अनुसार 2020 में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेशक 2.1 करोड़ थे जो 2022 में 3.4 करोड़, 2024 में 4.5 करोड़ और वर्तमान में 5.6 करोड़ है l 5 वर्ष में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेशकों की संख्या में 2.5 गुने से ज्यादा की वृद्धि हुई है l डेस्क में खुलनेवाले Demat खाते में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है जो दर्शाता है कि भारत की वित्तीय प्रणाली मजबूत हुई है और लोग वित्तीय रूप से जागरूक हो रहे हैं l

स्टॉक एक्सचेंज कुछ जोखिमों के साथ बेहतर Return देते हैं जोकि मुद्रास्फीति के प्रभाव से निवेशकों को सुरक्षित रखते हैं l AMFI के आंकड़ो से एक दिलचस्प बात सामने आती है कि म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का 45% छोटे 30 शहरों से आते हैं हालाँकि अभी भी 65% निवेश शिखरपर स्थित 30 शहरों से आते हैं l बैंकिंग में तकनीक की उप्लब्द्धता ने वैकल्पिक निवेश को काफी असं बना दिया है जिसका लाभ जनता उठा पा रही है l

आने वाले समय में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश और तेजी से बढेगा क्योकि इस दिशा में जागरूकता बढाने का प्रयास हो रहा है l इस क्रम में बिहार, उड़ीसा, असम, आंध्र प्रदेश में पोस्ट ऑफिस का सक्रिय सहयोग लेने की योजना कई जिसमें डाकिये ग्रामीण क्षेत्रों में म्यूच्यूअल फण्ड का प्रचार करेंगे और लोगों को इसके लाभों से परिचित करायेंगे l

म्यूच्यूअल फण्ड देश के कैपिटल मार्केट में निवेश का सबसे सरल और सुरक्षित माध्यम है और कैपिटल मार्केट में ज्यादा से ज्यादा खुदरा निवेशक कैपिटल मार्केट को मजबूत बनाते हैं l कैपिटल मार्केट की मजबूती देश की अर्थव्यवस्था की अवस्था का परिचायक होता है जो विदेशी निवेशकों को विश्वास दिलाता है और देश में निवेश के लिए आकर्षित करता है l