ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत में CNG और PNG की कीमतें स्थिर, अडानी टोटल गैस ने दी आम जनता को राहत
New Delhi : पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका से आयातित गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में अडानी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और घरेलू PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतें नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि, बड़े इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स के लिए गैस की बढ़ी हुई मात्रा को कम कर दिया गया है।
कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि ATGL की लगभग 70 प्रतिशत गैस की सप्लाई घरेलू स्रोतों से होती है, जो CNG से चलने वाली गाड़ियों और घरेलू किचन में इस्तेमाल होने वाली PNG को दी जाती है। ऐसे में गाड़ी मालिकों और घरों में गैस का खर्च नहीं बढ़ेगा।
इंडस्ट्रियल सेक्टर पर क्या असर?
ATGL, अडानी ग्रुप और फ्रेंच एनर्जी कंपनी TotalEnergies का जॉइंट वेंचर है। कंपनी की 70 प्रतिशत सप्लाई घरेलू स्रोतों से आती है, लेकिन बाकी लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा आयातित LNG से आता है, जिसे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स को सप्लाई किया जाता है। होर्मुज स्ट्रेट पर युद्ध के कारण आयात बाधित होने से कंपनी को यह हिस्सा इंटरनेशनल स्पॉट मार्केट से ऊंचे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।
इसलिए कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को अपने कॉन्ट्रैक्टेड वॉल्यूम के *40 प्रतिशत तक* खपत कम करने के लिए कहा गया है। 40 प्रतिशत से ज्यादा इस्तेमाल करने पर कीमतें लगभग तीन गुना बढ़ा दी गई हैं। यह दर *40 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर* से बढ़कर *119 रुपये SCM* हो गई है।
स्पॉट कीमतों में उछाल
कंपनी को स्पॉट मार्केट से LNG खरीदने पर अब 24-25 डॉलर प्रति mmBtu का खर्च उठाना पड़ रहा है, जबकि पहले यह करीब 10 डॉलर प्रति mmBtu था। इसलिए 40 प्रतिशत से अधिक इस्तेमाल पर कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। कंपनियों को उनके कॉन्ट्रैक्टेड रेट्स पर बिल भेजा जाएगा, जिससे उन्हें जरूरत पड़ने पर दूसरे फ्यूल सोर्स पर शिफ्ट करने की फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी।
