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Colgate Price Hike: अब टूथपेस्ट पर भी महंगाई की मार, कोलगेट ने बढ़ाए दाम

 
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दिग्गज एफएमसीजी कंपनी Colgate-Palmolive ने मई महीने में अपने कई लोकप्रिय टूथपेस्ट पैक्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने कुछ बड़े और प्रीमियम पैक्स के दाम करीब 4 से 5 फीसदी तक बढ़ाए हैं। बताया जा रहा है कि कच्चे माल, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ने की वजह से कंपनी पर मार्जिन बचाने का दबाव था, जिसके चलते यह फैसला लिया गया।

किन पैक्स के बढ़े दाम?

कंपनी ने Colgate Dental Cream, Colgate Max Fresh और Visible White जैसे लोकप्रिय वेरिएंट्स की कीमतों में बदलाव किया है।

Colgate Dental Cream (200g + 100g + टूथब्रश पैक) अब 208 रुपये का मिलेगा। इसकी कीमत में 8 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
Colgate Dental Cream (200g) की कीमत 5 रुपये बढ़कर 135 रुपये हो गई है।
Colgate Dental Cream (100g) अब 73 रुपये का मिलेगा। इसमें 3 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, हालांकि कंपनी ने इसका वजन 10% बढ़ाया है।
Colgate Max Fresh Blue (70g + 15% Extra) की कीमत 4 रुपये बढ़कर 83 रुपये हो गई है।
प्रीमियम कैटेगरी के Visible White Purple (200g + 20% Extra) पैक में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसकी कीमत 17 रुपये बढ़कर 395 रुपये हो गई है।

डिस्ट्रीब्यूटर्स के मुताबिक, फिलहाल छोटे और कम कीमत वाले पैक्स के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, क्योंकि आम उपभोक्ता इन प्रोडक्ट्स की कीमत को लेकर ज्यादा संवेदनशील रहते हैं।

क्यों बढ़ाने पड़े दाम?

एफएमसीजी कंपनियां पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ती लागत का सामना कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, केमिकल डेरिवेटिव्स, प्लास्टिक पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स खर्च में तेजी से इजाफा हुआ है।

कंपनी ने अपनी चौथी तिमाही के नतीजों के दौरान संकेत दिया था कि लागत बढ़ने पर चुनिंदा पैक्स की कीमत या साइज में बदलाव किया जा सकता है।

भारतीय बाजार में Colgate का दबदबा

भारतीय टूथपेस्ट बाजार में Colgate की मजबूत पकड़ मानी जाती है।

कंपनी की बाजार हिस्सेदारी करीब 45 से 50 फीसदी बताई जाती है।
यह Pepsodent, Close-Up, Dabur Red, Sensodyne और Patanjali Dant Kanti जैसे ब्रांड्स से आगे बनी हुई है।
कंपनी की कुल कमाई का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा टूथपेस्ट कारोबार से आता है।
इसका EBITDA मार्जिन करीब 30 से 32 फीसदी है, जिसे इंडस्ट्री में मजबूत माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां फिलहाल मिड और प्रीमियम सेगमेंट के ग्राहकों पर ज्यादा कीमत का बोझ डाल रही हैं, क्योंकि इन श्रेणियों में ग्राहक महंगे दाम पर भी खरीदारी जारी रखते हैं।