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Dhanteras 2026: पिछले साल खरीदा सोना कितना महंगा हुआ? जानिए एक साल में कितनी बढ़ी कीमत

धनतेरस 2026 पर सोना पिछले साल के मुकाबले 5.5 से 7.6 प्रतिशत महंगा है। जनवरी में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद कीमतों में करीब 20 प्रतिशत गिरावट आई है। जानिए 24 और 22 कैरेट सोने का मौजूदा भाव, एक साल में कीमतों का अंतर और भारत में सोने की मांग के ताजा आंकड़े।

 
Dhanteras 2026
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Dhanteras 2026: धनतेरस पर सोना खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को इस साल भी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद सोने के भाव में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद सोना पिछले धनतेरस की तुलना में 5.5 से 7.6 प्रतिशत तक महंगा है। यानी 10 ग्राम सोने के लिए खरीदारों को करीब 8,000 से 10,000 रुपये अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं।

इस साल धनतेरस 6 नवंबर को है। फिलहाल 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.38 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच है। वहीं, 22 कैरेट सोना 1.27 लाख से 1.29 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है। इन कीमतों में जीएसटी और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं।

पिछले धनतेरस के मुकाबले कितना महंगा हुआ सोना?

पिछले साल धनतेरस के आसपास 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.30 लाख से 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस साल भाव में हालिया गिरावट के बावजूद सोना 5.5 से 7.6 प्रतिशत महंगा है। इसका मतलब है कि पिछले एक साल में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 8,000 से 10,000 रुपये बढ़ गई है।

साल 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतों में तेज उछाल आया था। जनवरी के आखिरी सप्ताह में इसका भाव करीब 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में गिरावट शुरू हुई और अब सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 20 प्रतिशत नीचे है। अक्टूबर में ही कीमतों में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सोने की मांग पर महंगी कीमतों का असर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की 3 नवंबर को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में केंद्रीय बैंकों और संस्थागत निवेशकों ने सोने की खरीद बढ़ाई। इस दौरान केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में शुद्ध रूप से 321 टन सोना जोड़ा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 42 प्रतिशत ज्यादा है।

साल 2026 के पहले नौ महीनों में केंद्रीय बैंकों की कुल खरीद 675 टन रही, जो पिछले साल की समान अवधि से 6 प्रतिशत अधिक है। वहीं, गोल्ड आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में भी दूसरी तिमाही के बाद फिर से निवेश लौटा। जुलाई-सितंबर के दौरान इनमें 211 टन सोना जुड़ा।

हालांकि, आम खरीदारों की तरफ से मांग का रुझान अलग रहा। रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी तिमाही में वैश्विक स्तर पर सोने के बार और सिक्कों की मांग सालाना आधार पर 19 प्रतिशत घट गई। इसी अवधि में आभूषणों की मांग में भी 17 प्रतिशत की गिरावट आई। ऊंची कीमतों के कारण खुदरा खरीदार खरीदारी में सावधानी बरत रहे हैं।

भारत में सोने की मांग में भी आई गिरावट

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान सोने की मांग पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ी। हालांकि, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में यह 29 प्रतिशत कम रही।

इस दौरान भारत में आभूषणों की मांग तिमाही आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर 100 टन पहुंच गई, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सोने के बार और सिक्कों की वैश्विक मांग में भारत की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण रही। जुलाई-सितंबर तिमाही में चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा और वैश्विक मांग में इसकी हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत में डिजिटल गोल्ड की खरीदारी इस तिमाही में सालाना आधार पर 44 प्रतिशत बढ़ी। जनवरी से सितंबर के बीच डिजिटल गोल्ड की खरीद पिछले साल की समान अवधि से 76 प्रतिशत अधिक रही।

सोने की कीमतों में तेजी थमने की वजह क्या रही?

साल की शुरुआत में सोने की कीमतों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी फैसलों से पैदा हुई अनिश्चितता, गोल्ड ETF में निवेश और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी से समर्थन मिला था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने भी कीमतों को बढ़ावा दिया।

लेकिन दूसरी तिमाही में परिस्थितियां बदलने लगीं। अमेरिका के टैरिफ और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण महंगाई की आशंकाएं बढ़ीं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से परिवहन, विनिर्माण और बिजली की लागत बढ़ने का दबाव बना। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल होने की आशंका बढ़ी।

इसके चलते बाजार में लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की उम्मीद मजबूत हुई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और वास्तविक ब्याज दरों में बढ़ोतरी ने सोने को निवेश के दूसरे विकल्पों के मुकाबले कम आकर्षक बनाया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान भू-राजनीतिक तनाव के मुकाबले महंगाई और ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर ज्यादा रहा।

पिछले धनतेरस खरीदे सोने पर कितना मिला रिटर्न?

अगर किसी व्यक्ति ने पिछले धनतेरस के आसपास सोना खरीदा था, तो एक साल में उसकी कीमत में करीब 5.5 से 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यानी सोने में निवेश करने वालों को इस अवधि में 10 ग्राम पर लगभग 8,000 से 10,000 रुपये का मूल्य लाभ हुआ है।

हालांकि, इस रिटर्न की तुलना फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य निश्चित आय वाले निवेश विकल्पों से भी की जा सकती है। ऐसे विकल्पों में कभी-कभी सोने के बराबर या उससे बेहतर रिटर्न मिल सकता है और उनमें रोजाना कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम भी नहीं होता।

फिलहाल केंद्रीय बैंकों और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से सोने की मांग को समर्थन मिल रहा है। आने वाले समय में इसकी कीमतों की दिशा काफी हद तक ब्याज दरों, महंगाई और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।