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क्या आप जानते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम कौन तय करता है? क्यों हर दिन बदलते हैं रेट

 
क्या आप जानते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम कौन तय करता है? क्यों हर दिन बदलते हैं रेट
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Mumbai : देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जैसे ही बढ़ोतरी होती है, उसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर दिखने लगता है। क्योंकि इसका असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जी, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तय कैसे होते हैं और इनकी समीक्षा कब की जाती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है कीमतें

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के रूप में आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का सीधा असर देश के पेट्रोल और डीजल के रेट पर पड़ता है।

हालांकि सिर्फ क्रूड ऑयल की कीमत ही अंतिम रेट तय नहीं करती। इसमें डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ट्रांसपोर्ट लागत, रिफाइनिंग खर्च और डीलर कमीशन भी शामिल होते हैं।

कौन तय करता है पेट्रोल-डीजल के दाम?

भारत में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय करती हैं। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के रेट और अन्य खर्चों को जोड़कर रोजाना कीमतों में बदलाव करती हैं।

जून 2017 से देश में डेली प्राइस रिवीजन सिस्टम लागू है, जिसके तहत हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी किए जाते हैं।

टैक्स का बड़ा हिस्सा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सबसे बड़ा हिस्सा टैक्स का होता है। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जबकि राज्य सरकारें वैट (VAT) वसूलती हैं।

इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में ईंधन के दाम अलग-अलग होते हैं। जैसे दिल्ली और मुंबई के पेट्रोल रेट में अंतर सिर्फ दूरी या ट्रांसपोर्ट की वजह से नहीं, बल्कि टैक्स स्ट्रक्चर के कारण भी होता है।

कब बढ़ते हैं तेल के दाम?

जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं या डॉलर मजबूत होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना बढ़ जाती है।

इसके अलावा युद्ध, वैश्विक तनाव, सप्लाई में कमी और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारण भी तेल की कीमतों को प्रभावित करते हैं। कई बार सरकार टैक्स कम करके राहत देने की कोशिश भी करती है।

आम जनता पर सीधा असर

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर हर वर्ग पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे हो जाते हैं।

यही वजह है कि ईंधन की कीमतें हमेशा देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रहती हैं।