Dollar Vs Rupee : डॉलर के मुकाबले रुपये की जोरदार वापसी, लगाई इतनी लंबी छलांग
Mar 30, 2026, 10:56 IST
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नई दिल्ली। पिछले कई सत्रों से दबाव झेल रहे भारतीय रुपये ने सोमवार सुबह जोरदार वापसी करते हुए बाजार को चौंका दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया 130 पैसे की मजबूती के साथ ₹93.59 पर खुला। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में यह ₹94.85 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
RBI के कदम से बाजार में आई तेजी
रुपये में इस मजबूती के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों, खासकर प्राइवेट और विदेशी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे भारतीय मुद्रा में अपनी नेट ओपन पोजीशन (NOP-INR) को 100 मिलियन डॉलर के भीतर सीमित रखें।
बैंकों को इस नियम का पालन 10 अप्रैल तक करना अनिवार्य किया गया है, जिससे बाजार में अनुशासन बढ़ेगा।
18 बिलियन डॉलर की पोजीशन होगी खत्म
बाजार के जानकारों का मानना है कि RBI के इस फैसले के चलते बैंकों को अपनी पुरानी पोजीशन में बदलाव करना पड़ेगा। अनुमान है कि इससे करीब 18 बिलियन डॉलर की पोजीशन स्क्वायर ऑफ होगी।
इस प्रक्रिया से बाजार में डॉलर की मांग घटेगी और रुपये को मजबूत होने में मदद मिलेगी।
युद्ध का पड़ा था असर
गौरतलब है कि मार्च महीने में ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया 4% से ज्यादा टूट चुका था। इस गिरावट के चलते भारतीय मुद्रा एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गई थी।
हालांकि, RBI लगातार स्पॉट और फॉरवर्ड मार्केट में हस्तक्षेप कर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा था।
क्या यह मजबूती टिकेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपये में आई यह मजबूती अस्थायी हो सकती है। यह सुधार बुनियादी आर्थिक बदलावों की वजह से नहीं, बल्कि बैंकों द्वारा अपनी पोजीशन कम करने के कारण आया है।
ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और बाजार की चाल रुपये की दिशा तय करेंगे।
RBI के कदम से बाजार में आई तेजी
रुपये में इस मजबूती के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों, खासकर प्राइवेट और विदेशी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे भारतीय मुद्रा में अपनी नेट ओपन पोजीशन (NOP-INR) को 100 मिलियन डॉलर के भीतर सीमित रखें।
बैंकों को इस नियम का पालन 10 अप्रैल तक करना अनिवार्य किया गया है, जिससे बाजार में अनुशासन बढ़ेगा।
18 बिलियन डॉलर की पोजीशन होगी खत्म
बाजार के जानकारों का मानना है कि RBI के इस फैसले के चलते बैंकों को अपनी पुरानी पोजीशन में बदलाव करना पड़ेगा। अनुमान है कि इससे करीब 18 बिलियन डॉलर की पोजीशन स्क्वायर ऑफ होगी।
इस प्रक्रिया से बाजार में डॉलर की मांग घटेगी और रुपये को मजबूत होने में मदद मिलेगी।
युद्ध का पड़ा था असर
गौरतलब है कि मार्च महीने में ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया 4% से ज्यादा टूट चुका था। इस गिरावट के चलते भारतीय मुद्रा एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गई थी।
हालांकि, RBI लगातार स्पॉट और फॉरवर्ड मार्केट में हस्तक्षेप कर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा था।
क्या यह मजबूती टिकेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपये में आई यह मजबूती अस्थायी हो सकती है। यह सुधार बुनियादी आर्थिक बदलावों की वजह से नहीं, बल्कि बैंकों द्वारा अपनी पोजीशन कम करने के कारण आया है।
ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और बाजार की चाल रुपये की दिशा तय करेंगे।
