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बैंक फ्रॉड पर सरकार का चौंकाने वाला आंकड़ा, 5 सालों में ₹1.42 लाख करोड़ की धोखाधड़ी, 4.5% रकम ही हो सकी रिकवर

 
Bank Fraud
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नई दिल्ली। देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर संसद में एक बड़ा खुलासा हुआ है। वित्त मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वित्तीय वर्षों में देश के विभिन्न बैंकों में ₹1,42,112 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि इस भारी-भरकम राशि में से अब तक केवल ₹6,389 करोड़, यानी करीब 4.5 प्रतिशत, की ही वसूली हो सकी है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक और ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस शामिल हैं।

सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन खातों में धोखाधड़ी हुई है, उनसे धन की वसूली की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है। हालांकि, अब तक कुल धोखाधड़ी राशि का केवल 4.5 प्रतिशत ही वापस हासिल किया जा सका है।

वित्त राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि RBI जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले (Wilful Defaulters) लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का अलग से रिकॉर्ड नहीं रखता। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार 31 मार्च 2026 तक ऐसे मामलों में कानूनी और रिकवरी संबंधी कई कदम उठाए गए हैं।

विलफुल डिफॉल्टर्स पर सख्त कार्रवाई

सरकार के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ अब तक:

15,577 रिकवरी केस दायर किए हैं।
10,894 मामलों में SARFAESI Act के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।
7,173 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं।

रिकवरी इतनी कम क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बड़े बैंक फ्रॉड का पता लगाने और उसे आधिकारिक तौर पर धोखाधड़ी घोषित करने में अक्सर 2 से 5 साल का समय लग जाता है। इस दौरान आरोपी रकम को शेल कंपनियों, विदेशी खातों, बेनामी संपत्तियों या क्रिप्टोकरेंसी में स्थानांतरित कर देते हैं।

इसके अलावा लंबी कानूनी प्रक्रिया, वर्षों तक चलने वाले मुकदमे, संपत्तियों की कुर्की और नीलामी में देरी जैसी वजहों से भी बैंकों की रिकवरी की रफ्तार काफी धीमी रहती है। यही कारण है कि भारी वित्तीय धोखाधड़ी के बावजूद बैंकों को पूरी राशि वापस नहीं मिल पाती।