Gold Price Crash: सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, 11 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा गोल्ड, जानिए क्यों टूटा मार्केट
Gold Price Crash: सोना और चांदी की कीमतों में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मजबूत अमेरिकी डॉलर, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका ने वैश्विक बुलियन बाजार में भारी बिकवाली को जन्म दिया। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट दर्ज हुई।
ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार भारत में सोने की कीमत 2,677 रुपये यानी करीब 1.76 प्रतिशत टूटकर 1,49,766 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। वहीं चांदी की कीमत में 4,347 रुपये यानी 1.82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 2,34,181 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
11 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा सोना
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। स्पॉट गोल्ड करीब 1.9 प्रतिशत गिरकर 4,181 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.9 प्रतिशत टूटकर 4,204.70 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट पिछले लगभग 11 सप्ताह का सबसे निचला स्तर है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
आखिर क्यों गिर रहा है सोना और चांदी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर की मजबूती का मतलब है कि सोना जैसे डॉलर-आधारित कमोडिटी अन्य देशों के खरीदारों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग घटती है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या फिर साल के अंत तक एक और बढ़ोतरी कर सकता है।
ब्याज दर बढ़ने से क्यों दबाव में आता है सोना?
सोना ऐसा निवेश है जिस पर कोई निश्चित ब्याज या रिटर्न नहीं मिलता। दूसरी ओर बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां निवेशकों को नियमित आय प्रदान करती हैं।
ऐसे में जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक सोने की बजाय ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञ इलिया स्पिवाक के अनुसार फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर बदली हुई धारणा, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और डॉलर की मजबूती फिलहाल सोने की कीमतों को नीचे धकेल रही है।
दिसंबर तक रेट बढ़ने की आशंका
सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार बाजार में दिसंबर तक अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना 70 प्रतिशत से अधिक आंकी जा रही है। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश के रूप में सोने में नई खरीदारी से बच रहे हैं और बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई अनिश्चितता
सोना और चांदी की कीमतों में आई गिरावट ऐसे समय पर हुई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे समेत खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।
इन घटनाओं ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। हालांकि सामान्य परिस्थितियों में भू-राजनीतिक तनाव सोने को समर्थन देता है, लेकिन इस बार निवेशकों का फोकस अधिकतर ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती पर रहा।
मजबूत अमेरिकी आंकड़ों ने बढ़ाया दबाव
कमोडिटी रिसर्च फर्मों का कहना है कि अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने भी बुलियन बाजार को कमजोर किया है। बेहतर हाउसिंग डेटा और मजबूत रोजगार संकेतों ने यह धारणा मजबूत की है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है। इससे फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव बढ़ा है। इसके अलावा जापान के केंद्रीय बैंक की ओर से भी संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के संकेत मिलने से कीमती धातुओं पर अतिरिक्त दबाव बना।
आगे क्या होगा? 4,100 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने के लिए 4,100 डॉलर प्रति औंस का स्तर बेहद अहम रहेगा।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इस स्तर से नीचे फिसलता है तो बाजार का रुख और कमजोर हो सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में वर्ष के अंत तक सोना 3,500 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकता है। हालांकि अंतिम दिशा काफी हद तक अमेरिका के आगामी महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों पर निर्भर करेगी।
अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी दबाव देखा गया। स्पॉट सिल्वर करीब 2.1 प्रतिशत गिरकर 64.01 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। प्लेटिनम 3.4 प्रतिशत टूटकर 1,667.92 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि पैलेडियम में भी 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बेस मेटल्स में तस्वीर अलग
हालांकि बेस मेटल्स बाजार में मिश्रित रुख देखने को मिला। तांबा लगभग स्थिर बना रहा और 13,615 डॉलर प्रति टन के आसपास कारोबार करता रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश के कारण तांबे की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है। चीन द्वारा डेटा सेंटर विकास में बड़े निवेश की योजनाओं को भी तांबे के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। वहीं जिंक और एल्युमिनियम की सीमित आपूर्ति भी इन धातुओं को मध्यम अवधि में समर्थन देती दिखाई दे रही है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। बाजार फिलहाल ब्याज दरों, महंगाई और वैश्विक तनावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले सप्ताहों में अमेरिकी महंगाई आंकड़े और फेडरल रिजर्व की नीति सोना-चांदी की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
