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Gold-Silver Price Crash: सोना-चांदी की चमक क्यों पड़ी फीकी? रिकॉर्ड हाई से गिरावट के पीछे 5 बड़े कारण, निवेशक अब क्या करें?

सोना और चांदी रिकॉर्ड हाई से गिरकर दबाव में हैं। डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और ब्याज दरों की आशंका ने बुलियन बाजार की चमक फीकी कर दी है। जानिए गिरावट की वजह, आगे का अनुमान और निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह।
 
Gold-Silver Price Crash
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Gold-Silver Price Crash: कुछ महीने पहले तक सोना और चांदी निवेशकों की पहली पसंद बने हुए थे। सोना लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा था, जबकि चांदी भी कई वर्षों की सबसे मजबूत तेजी का आनंद ले रही थी। वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई की चिंता और बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने बड़ी संख्या में बुलियन की ओर रुख किया था।

लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। हाल के सप्ताहों में सोना और चांदी दोनों अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे फिसल गए हैं। एमसीएक्स (MCX) पर भी दोनों धातुओं में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सोना-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं और निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

1. मुनाफावसूली बनी सबसे बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह Profit Booking (मुनाफावसूली) है। पिछले एक वर्ष में सोना और चांदी ने शानदार रिटर्न दिया है। ऐसे में कई निवेशकों और ट्रेडर्स ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। जब किसी एसेट में तेज और लगातार बढ़त देखने को मिलती है तो कुछ समय बाद बाजार में करेक्शन आना सामान्य माना जाता है।

2. डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव

सोना और चांदी की कीमतों का अमेरिकी डॉलर से उल्टा संबंध माना जाता है। हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है, जिससे बुलियन बाजार पर दबाव बढ़ा है। मजबूत डॉलर के कारण सोना और चांदी अन्य देशों के खरीदारों के लिए महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निवेशकों का रुझान फिलहाल डॉलर आधारित निवेशों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

3. कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 91 से 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। तेल महंगा होने से महंगाई का खतरा बढ़ता है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रखने का विकल्प चुन सकते हैं। इससे सोना और चांदी जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश विकल्पों की आकर्षण क्षमता कम हो जाती है।

इसी कारण निवेशकों का मूड फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

4. ब्याज दरों को लेकर बढ़ी आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियां भी बुलियन बाजार पर असर डाल रही हैं। अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले साधनों की ओर रुख कर सकते हैं। यही आशंका बाजार में बिकवाली को बढ़ावा दे रही है।

5. वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों की सतर्कता

भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक आंकड़े और केंद्रीय बैंकों की नीतियां निवेशकों को लगातार प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों को लेकर नई रणनीति बना रहे हैं, जिसका असर सोना-चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

चार्ट क्या संकेत दे रहे हैं?

Enrich Money के CEO पोन्मुडी आर के अनुसार एमसीएक्स गोल्ड 1.50 लाख रुपये के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल चुका है। उनके मुताबिक- यदि सोना फिर से 1.50 लाख रुपये के ऊपर टिकता है तो कीमतें 1.54 लाख से 1.55 लाख रुपये तक जा सकती हैं। लेकिन अगर यह 1.46 लाख रुपये के नीचे जाता है तो गिरावट बढ़कर 1.45 लाख से 1.43 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

चांदी के लिए क्या है अगला स्तर?

विशेषज्ञों के अनुसार एमसीएक्स चांदी फिलहाल 2.30 लाख रुपये के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर के आसपास कारोबार कर रही है। 2.36 लाख रुपये के ऊपर मजबूती मिलने पर चांदी 2.40 लाख से 2.43 लाख रुपये तक जा सकती है। वहीं 2.30 लाख रुपये का स्तर टूटने पर कीमतें 2.28 लाख से 2.25 लाख रुपये तक फिसल सकती हैं।

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

घबराकर बिकवाली न करें

विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी के बाद करेक्शन बाजार का सामान्य हिस्सा है। केवल कुछ दिनों की गिरावट देखकर निवेश निर्णय लेना सही नहीं होगा।

पोर्टफोलियो की समीक्षा करें

यदि आपके निवेश पोर्टफोलियो में सोने या चांदी का हिस्सा काफी बढ़ गया है तो अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार संतुलन बनाना बेहतर रहेगा।

धीरे-धीरे निवेश जारी रखें

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए SIP या चरणबद्ध निवेश रणनीति बेहतर मानी जाती है। इससे बाजार की अस्थिरता का प्रभाव कम होता है।

क्या आगे फिर चमकेगा सोना?

विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई जैसी परिस्थितियां भविष्य में फिर से सोने और चांदी को समर्थन दे सकती हैं। फिलहाल बाजार की नजर प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर टिकी हुई है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त विचार और बाजार अनुमान विशेषज्ञों के हैं। निवेश या ट्रेडिंग से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।