Gold-Silver Rate : मिडिल-ईस्ट युद्ध के बीच सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी, जानें आज कितना हुआ सस्ता
Mar 17, 2026, 10:31 IST
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Gold-Silver Rate : वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात में आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन कीमती धातुओं के बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को हैरानी हुई।
सोमवार को Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोने और चांदी दोनों के दाम में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम करीब 2690 से 2900 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना करीब 1.83 प्रतिशत गिरकर 1,55,566 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड करता दिखाई दिया।
चांदी में और बड़ी गिरावट
सोने के मुकाबले चांदी में और ज्यादा गिरावट देखने को मिली। सोमवार को चांदी की कीमत में प्रति किलो 4232 से 5000 रुपये तक की कमी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान चांदी करीब 2.11 प्रतिशत गिरकर 2.53 से 2.55 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में कारोबार करती दिखी।
बाजार के जानकारों का मानना है कि कारोबारी सत्र की शुरुआत ही कमजोर रही और पूरे दिन बाजार पर दबाव बना रहा।
युद्ध के बीच क्यों सस्ता हुआ सोना?
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव या युद्ध की स्थिति में निवेशक सोना और चांदी जैसे ‘सेफ हेवन’ निवेश की ओर रुख करते हैं, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद कीमतों में गिरावट ने बाजार को चौंका दिया।
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं।
कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी वजह
मार्केट रिसर्च के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई बढ़ने की स्थिति में Federal Reserve System (यूएस फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने से बचता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो बाजार में नकदी का प्रवाह कम हो जाता है और निवेशक सोने जैसे एसेट्स से दूरी बनाने लगते हैं।
डॉलर मजबूत होने से भी दबाव
ब्याज दरें ऊंची रहने पर अमेरिकी डॉलर मजबूत हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर सोना महंगा पड़ता है और इसकी मांग घट जाती है। मांग कम होने से कीमतों में गिरावट आने लगती है।
निवेशकों की बिकवाली भी बनी कारण
इसके अलावा, जब कमोडिटी और शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो कई निवेशक अपने घाटे की भरपाई करने के लिए सोना बेचकर नकदी जुटाते हैं। बाजार में आई हालिया गिरावट के पीछे यह भी एक अहम कारण माना जा रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उतार-चढ़ाव वाले समय में निवेशकों को घबराकर जल्दबाजी में फैसले नहीं लेने चाहिए। कमोडिटी बाजार में अल्पकालिक गिरावट सामान्य बात है।
लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए यह समय धीरे-धीरे खरीदारी करने का अवसर भी बन सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस साल दिवाली तक सोने की कीमतें फिर से रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं।
हालांकि निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे एक साथ बड़ी रकम निवेश करने के बजाय छोटी-छोटी किस्तों में निवेश करें और कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के रुझान तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नजर बनाए रखें।
सोमवार को Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोने और चांदी दोनों के दाम में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम करीब 2690 से 2900 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना करीब 1.83 प्रतिशत गिरकर 1,55,566 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड करता दिखाई दिया।
चांदी में और बड़ी गिरावट
सोने के मुकाबले चांदी में और ज्यादा गिरावट देखने को मिली। सोमवार को चांदी की कीमत में प्रति किलो 4232 से 5000 रुपये तक की कमी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान चांदी करीब 2.11 प्रतिशत गिरकर 2.53 से 2.55 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में कारोबार करती दिखी।
बाजार के जानकारों का मानना है कि कारोबारी सत्र की शुरुआत ही कमजोर रही और पूरे दिन बाजार पर दबाव बना रहा।
युद्ध के बीच क्यों सस्ता हुआ सोना?
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव या युद्ध की स्थिति में निवेशक सोना और चांदी जैसे ‘सेफ हेवन’ निवेश की ओर रुख करते हैं, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद कीमतों में गिरावट ने बाजार को चौंका दिया।
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं।
कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी वजह
मार्केट रिसर्च के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई बढ़ने की स्थिति में Federal Reserve System (यूएस फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने से बचता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो बाजार में नकदी का प्रवाह कम हो जाता है और निवेशक सोने जैसे एसेट्स से दूरी बनाने लगते हैं।
डॉलर मजबूत होने से भी दबाव
ब्याज दरें ऊंची रहने पर अमेरिकी डॉलर मजबूत हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर सोना महंगा पड़ता है और इसकी मांग घट जाती है। मांग कम होने से कीमतों में गिरावट आने लगती है।
निवेशकों की बिकवाली भी बनी कारण
इसके अलावा, जब कमोडिटी और शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो कई निवेशक अपने घाटे की भरपाई करने के लिए सोना बेचकर नकदी जुटाते हैं। बाजार में आई हालिया गिरावट के पीछे यह भी एक अहम कारण माना जा रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उतार-चढ़ाव वाले समय में निवेशकों को घबराकर जल्दबाजी में फैसले नहीं लेने चाहिए। कमोडिटी बाजार में अल्पकालिक गिरावट सामान्य बात है।
लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए यह समय धीरे-धीरे खरीदारी करने का अवसर भी बन सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस साल दिवाली तक सोने की कीमतें फिर से रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं।
हालांकि निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे एक साथ बड़ी रकम निवेश करने के बजाय छोटी-छोटी किस्तों में निवेश करें और कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के रुझान तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नजर बनाए रखें।
