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डीजल महंगा तो माल भाड़ा भी महंगा, ट्रांसपोर्ट सेक्टर का बड़ा फैसला, हर 1 रुपया बढ़ते ही बढ़ेगा ट्रक किराया

 
डीजल महंगा तो माल भाड़ा भी महंगा, ट्रांसपोर्ट सेक्टर का बड़ा फैसला, हर 1 रुपया बढ़ते ही बढ़ेगा ट्रक किराया
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Mumbai : पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। देशभर के ट्रांसपोर्टरों के संगठन अखिल भारतीय ट्रांसपोर्टर्स कल्याण संघ (AITWA) ने माल ढुलाई के किराए में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसके बाद सब्जी, अनाज, दवाइयों समेत ट्रकों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने वाले सामान महंगे होने की आशंका बढ़ गई है।

AITWA ने 20 मई 2026 से Fuel Adjustment Factor (FAF) लागू कर दिया है। नए नियम के तहत 15 मई 2026 की डीजल कीमत को आधार माना गया है। इसके बाद डीजल की कीमत में हर एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर माल भाड़े में स्वतः 0.65 फीसदी की वृद्धि जुड़ जाएगी। संगठन का कहना है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर बढ़ती लागत का भारी दबाव है, इसलिए यह फैसला लेना मजबूरी बन गया।

ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, बीते कुछ हफ्तों में डीजल की कीमतों के साथ-साथ कई अन्य खर्चों में भी तेजी आई है। वैश्विक स्तर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे ईंधन महंगा हुआ है। वहीं रुपये में कमजोरी के कारण आयात लागत भी बढ़ी है।

इसके अलावा AdBlue (DEF) की कीमतें पिछले दो महीनों में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। टायरों के दाम में करीब पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में टोल टैक्स भी बढ़ाया गया है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि कुल परिचालन लागत में डीजल की हिस्सेदारी करीब 65 फीसदी होती है, ऐसे में ईंधन महंगा होने का सीधा असर भाड़े पर पड़ना तय है।

ट्रक चालकों का कहना है कि यदि भाड़ा नहीं बढ़ाया गया तो उनके लिए खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा। ड्राइवरों के मुताबिक कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की किल्लत भी शुरू हो गई है। कुछ जगहों पर एक बार में 100 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जा रहा, जिससे लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ट्रांसपोर्टरों ने यह भी दावा किया है कि पहले से ही माल ढुलाई के ऑर्डर कम हो रहे हैं। मांग घटने और लागत बढ़ने की दोहरी मार से परिवहन उद्योग दबाव में है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क परिवहन भारत की सप्लाई चेन की रीढ़ है और इसमें आई लागत वृद्धि का असर जल्द ही बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।