भारतीय शेयर बाजार का सबसे खराब सप्ताह, निवेशकों के 20 लाख करोड़ रुपये डूबे
Mumbai : भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। इस सप्ताह Nifty 50 में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले चार वर्षों का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले जून 2022 में घरेलू शेयर बाजार में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई थी।
भारी गिरावट के कारण BSE Sensex में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 20 लाख करोड़ रुपये घट गया। वहीं, मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक निवेशकों की लगभग 33 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब चुकी है।
कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू शेयर बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत करीब 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा 400 मिलियन बैरल तेल जारी किए जाने के बावजूद कीमतों में तेजी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेजी बनी रह सकती है। निवेश बैंक Goldman Sachs ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यदि Strait of Hormuz नहीं खुलता है तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
लगातार तीसरे दिन बाजार में गिरावट
शुक्रवार (13 मार्च) को भी बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। दोपहर करीब 12:30 बजे तक BSE Sensex 1028.68 अंक गिरकर 75,005.74 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 361.05 अंक टूटकर 23,278.10 पर पहुंच गया।
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत
ईरान-इजरायल तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला। एशिया के प्रमुख बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई।
- Nikkei 225
- SSE Composite Index
- Hang Seng Index
इन बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशक ने करीब 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। मार्च महीने की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशक 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया है।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर
करेंसी बाजार में भी दबाव देखने को मिला। शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 12 पैसे गिरकर 92.37 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की निकासी और मजबूत डॉलर की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है।
रुपये की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ जाती है और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
