AI के डर से IT शेयरों में कोहराम, एक दिन में ₹2 लाख करोड़ स्वाहा
Mumbai : भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार (3 फरवरी) को IT सेक्टर पर जबरदस्त बिकवाली देखी गई। Nifty IT इंडेक्स 5.8% से 6.9% तक गिरा, जो मार्च 2020 के बाद सबसे तेज एकदिनी गिरावट थी। इस सेक्टर की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में ₹1.9 लाख करोड़ से ₹2 लाख करोड़ तक का नुकसान हुआ। प्रमुख IT कंपनियों के शेयरों में 5-8% तक की गिरावट दर्ज की गई:
- Infosys : 7-8.2% तक गिरा (कुछ समय में 8.23% तक, सबसे ज्यादा नुकसान)
- TCS : 5.6-7% तक गिरा
- Wipro : 3.9-6.7% तक गिरा
- HCL Tech : 5-5.8% तक गिरा
- Tech Mahindra : 5-6% तक गिरा
- LTIMindtree, Persistent Systems, Coforge, Mphasis : 6-7.6% तक गिरे
यह गिरावट सिर्फ मुनाफावसूली नहीं थी—इसके पीछे ग्लोबल AI कंपनी *Anthropic* के नए AI टूल लॉन्च की वजह से पैदा हुई चिंता थी।
Anthropic का नया AI टूल: Claude Cowork प्लग-इन्स
अमेरिकी AI स्टार्टअप Anthropic ने हाल ही में (फरवरी 2026 की शुरुआत में) Claude Cowork एजेंट के लिए नए प्लग-इन्स लॉन्च किए। ये टूल्स लीगल, सेल्स, मार्केटिंग, डेटा एनालिसिस, डॉक्यूमेंट रिव्यू, डेटा हैंडलिंग और प्रोसेसिंग जैसे कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं। ये वही काम हैं, जिनके लिए ग्लोबल कंपनियां सालों से भारतीय IT सर्विस प्रोवाइडर्स (TCS, Infosys, Wipro आदि) पर निर्भर रही हैं—जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी (स्टाफिंग-इंटेंसिव मॉडल) इन टास्क्स को हैंडल करते हैं।
निवेशकों को डर सताने लगा कि एडवांस्ड AI टूल्स आने वाले समय में पारंपरिक IT आउटसोर्सिंग की मांग को काफी कम कर सकते हैं। इससे IT कंपनियों के बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन पर लॉन्ग-टर्म असर पड़ सकता है।
ग्लोबल प्रभाव और ADR का असर
- अमेरिकी बाजार में Nasdaq 1.4% गिरा, टेक सेक्टर में $300 बिलियन से ज्यादा का नुकसान हुआ।
- Infosys और Wipro के अमेरिकी ADR (American Depository Receipts) में रातोंरात 4-5% गिरावट आई।
- यह सेंटीमेंट भारतीय बाजार में ट्रांसफर हो गया, जहां IT शेयर पहले से ही कमजोर थे।
क्या यह सिर्फ घबराहट है या असली खतरा?
फिलहाल यह गिरावट ज्यादा भविष्य की आशंकाओं (AI disruption) पर आधारित है, न कि कंपनियों के मौजूदा फंडामेंटल्स (Q3 रिजल्ट्स या गाइडेंस) पर। भारतीय IT सेक्टर अभी भी मजबूत क्लाइंट डिमांड, AI ट्रांसफॉर्मेशन सर्विसेज और डिजिटलाइजेशन से फायदा उठा रहा है। लेकिन निवेशक अब ज्यादा सतर्क हैं—AI को 'हेल्पर' से 'रिप्लेसर' के रूप में देखने लगे हैं।
