ITR Filing 2026: ये 10 गलतियां पड़ सकती हैं भारी, 5000 लेट फीस से 200% पेनल्टी तक का खतरा
ITR Filing 2026: आयकर रिटर्न (ITR) भरना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें की गई छोटी-सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। इनकम टैक्स विभाग ने साफ किया है कि देर से रिटर्न दाखिल करने, गलत जानकारी देने, आय छिपाने या गलत टैक्स छूट का दावा करने जैसी गलतियों पर जुर्माना, ब्याज और कई मामलों में 200 प्रतिशत तक की पेनल्टी भी लग सकती है। इसलिए ITR फाइल करने से पहले सभी जानकारियों का सावधानीपूर्वक मिलान करना बेहद जरूरी है।
देर से ITR फाइल करने पर कितनी लगेगी लेट फीस?
अगर निर्धारित समय सीमा के बाद ITR दाखिल किया जाता है तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है। जिन करदाताओं की कर योग्य आय 5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें अधिकतम ₹5,000 तक की लेट फीस भरनी पड़ सकती है। वहीं 5 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं के लिए यह शुल्क ₹1,000 तक सीमित है। इसके अलावा टैक्स बकाया होने पर अलग से ब्याज भी देना पड़ सकता है।
गलत जानकारी देने पर 200% तक की पेनल्टी
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपनी आय छिपाता है, गलत जानकारी देता है या फर्जी कटौती (Deduction) का दावा करता है, तो मामला सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहता। आयकर विभाग ऐसे मामलों में अंडर-रिपोर्टिंग या मिस-रिपोर्टिंग मानते हुए टैक्स की राशि का 200 प्रतिशत तक पेनल्टी लगा सकता है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
इन गलतियों से सबसे ज्यादा आते हैं टैक्स नोटिस
विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स नोटिस आने की सबसे बड़ी वजह गलत ITR फॉर्म चुनना, बैंक एफडी का ब्याज या अन्य आय छिपाना, कैपिटल गेन की जानकारी नहीं देना, AIS और Form 26AS का मिलान नहीं करना तथा गलत बैंक या PAN विवरण दर्ज करना है। विभाग अब डेटा एनालिटिक्स के जरिए ऐसी विसंगतियों की पहचान तेजी से कर रहा है।
सेल्फ असेसमेंट टैक्स जमा करना न भूलें
अगर TDS और एडवांस टैक्स के बाद भी टैक्स देनदारी बचती है, तो ITR दाखिल करने से पहले सेल्फ असेसमेंट टैक्स जमा करना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर अतिरिक्त ब्याज और पेनल्टी लग सकती है।
ई-वेरिफिकेशन करना भी है जरूरी
कई लोग ITR दाखिल तो कर देते हैं, लेकिन उसका ई-वेरिफिकेशन नहीं करते। आयकर विभाग के अनुसार ई-वेरिफिकेशन पूरा किए बिना रिटर्न की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने के बाद समय रहते उसका सत्यापन भी अवश्य करें।
इनकम टैक्स विभाग की सलाह
विशेषज्ञ और आयकर विभाग दोनों की सलाह है कि ITR दाखिल करने से पहले AIS, Form 26AS, प्री-फिल्ड जानकारी, सभी आय स्रोत, बैंक खाते और टैक्स कटौती का अच्छी तरह मिलान करें। जल्दबाजी में रिटर्न भरने के बजाय सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही ITR फाइल करें, ताकि जुर्माने, टैक्स नोटिस और रिफंड में देरी जैसी परेशानियों से बचा जा सके।
