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Mutual Fund Rules: म्यूचुअल फंड निवेशक की मौत के बाद किसे मिलेगा पैसा? SEBI के नए नियम समझें

 
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Mutual Fund Rules: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के लिए नॉमिनी की जानकारी अपडेट रखना जरूरी है। निवेशक की मृत्यु होने पर उसके म्यूचुअल फंड की यूनिट्स को जीवित संयुक्त खाताधारक, रजिस्टर्ड नॉमिनी या कानूनी वारिस के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नया फ्रेमवर्क लागू किया है।

22 अगस्त 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए दस्तावेजों और क्लेम की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। साथ ही, वैरिफाई किए जा सकने वाले QR कोड वाले मृत्यु प्रमाणपत्र को स्वीकार करने और जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद क्लेम की प्रक्रिया 21 कैलेंडर दिनों में पूरी करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

क्या है म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन?

म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी निवेशक की मृत्यु के बाद उसके नाम पर मौजूद म्यूचुअल फंड यूनिट्स को नियमों के अनुसार दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया जाता है।

यह प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन परिस्थितियों में लागू होती है:

निवेश संयुक्त रूप से किया गया हो और एक खाताधारक की मृत्यु हो जाए।
निवेश एक व्यक्ति के नाम पर हो और नॉमिनी पहले से दर्ज हो।
निवेश एक व्यक्ति के नाम पर हो, लेकिन नॉमिनी दर्ज न किया गया हो।

तीनों मामलों में क्लेम की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज अलग-अलग हो सकते हैं।

1. ज्वाइंट होल्डिंग में क्या होगा?

अगर म्यूचुअल फंड में दो लोगों के नाम संयुक्त खाताधारक के रूप में दर्ज हैं और उनमें से किसी एक की मृत्यु हो जाती है, तो जीवित खाताधारक के नाम यूनिट्स ट्रांसफर करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

नए फ्रेमवर्क के तहत ऐसे मामलों में प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। निर्धारित शर्तें पूरी होने पर जीवित खाताधारक को मृतक का वैरिफाई किया जा सकने वाला मृत्यु प्रमाणपत्र देना होगा। सामान्य परिस्थितियों में उससे बार-बार केवाईसी, इंडेमनिटी बॉन्ड या अंडरटेकिंग जैसे अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की जरूरत कम की गई है।

हालांकि, संबंधित म्यूचुअल फंड हाउस या रजिस्ट्रार की ओर से बताए गए फॉर्म और लागू प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा।

2. नॉमिनी दर्ज है तो कैसे मिलेगा पैसा?

अगर म्यूचुअल फंड निवेश केवल एक व्यक्ति के नाम पर है और उसने नॉमिनी का नाम दर्ज कराया है, तो निवेशक की मृत्यु के बाद नॉमिनी संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) या रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास क्लेम कर सकता है।

इसके लिए आम तौर पर इन दस्तावेजों की जरूरत होती है:

ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट फॉर्म।
मृतक का वैरिफाई किया जा सकने वाला मृत्यु प्रमाणपत्र।
म्यूचुअल फंड होल्डिंग का स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SoA)।
संबंधित मामले में मांगे गए अन्य जरूरी दस्तावेज।

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है: नॉमिनी दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर परिस्थिति में निवेश का अंतिम कानूनी मालिक बन जाता है। नॉमिनी को यूनिट्स ट्रांसफर होने के बावजूद अंतिम लाभकारी स्वामित्व का निर्धारण लागू उत्तराधिकार कानून के अनुसार हो सकता है।

इसलिए नॉमिनी और कानूनी वारिस की भूमिका को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

3. नॉमिनी नहीं है तो किसे मिलेगा निवेश का पैसा?

अगर निवेशक ने किसी नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं कराया है, तो क्लेम करने वाले व्यक्ति को अपनी पात्रता और मृतक से संबंध साबित करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की जरूरत क्लेम की रकम और निवेश रखने के तरीके पर निर्भर करेगी।

स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SoA) के लिए क्लेम की सीमा

₹10,000 तक का क्लेम: निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले निकट संबंधियों के लिए क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग (QTP) का विकल्प है। इसमें जरूरी फॉर्म, मृत्यु प्रमाणपत्र और रिश्ते का प्रमाण जैसे दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।

₹10,000 से ₹10 लाख तक का क्लेम: इस श्रेणी में सरल दस्तावेजी प्रक्रिया लागू हो सकती है। मामले के अनुसार इंडेमनिटी बॉन्ड, कानूनी वारिसों का शपथपत्र या अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मांगा जा सकता है।

₹10 लाख से अधिक का क्लेम: इसमें कानूनी वारिस होने का अधिक मजबूत प्रमाण देना पड़ सकता है। मामले के अनुसार वसीयत, लीगल हेयरशिप सर्टिफिकेट, सक्सेशन सर्टिफिकेट या अन्य निर्धारित दस्तावेजों की जरूरत हो सकती है।

हर मामले में वसीयत का प्रोबेट अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कौन-सा दस्तावेज जरूरी होगा, यह संबंधित मामले और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

डीमैट खाते में निवेश है तो क्या बदल जाएगा?

अगर म्यूचुअल फंड यूनिट्स डीमैट खाते में रखी गई हैं, तो क्लेम की रकम के आधार पर लागू सीमाएं अलग हैं।

₹30,000 तक: निर्धारित शर्तों के तहत क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग का विकल्प।
₹30,000 से ₹30 लाख तक: निर्धारित शर्तों के तहत सरल दस्तावेजी प्रक्रिया।

इन सीमाओं को संबंधित प्रक्रिया के संदर्भ में ही समझना चाहिए। बड़े क्लेम या विवादित उत्तराधिकार के मामलों में अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत हो सकती है।

मृत्यु प्रमाणपत्र और क्लेम की समयसीमा में क्या बदलाव हुआ?

SEBI के नए फ्रेमवर्क में दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया को भी सरल बनाने पर जोर दिया गया है।

QR कोड वाला मृत्यु प्रमाणपत्र: अब सत्यापन योग्य QR कोड वाले मृत्यु प्रमाणपत्र को भी स्वीकार किया जा सकता है। इससे दस्तावेजों की पुष्टि करने में सुविधा मिल सकती है।

21 कैलेंडर दिनों में प्रक्रिया: सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद AMC को ट्रांसमिशन क्लेम की प्रक्रिया 21 कैलेंडर दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।

देरी या क्लेम खारिज होने पर जानकारी: यदि क्लेम में देरी होती है या उसे अस्वीकार किया जाता है, तो संबंधित कारण लिखित रूप में बताना होगा।

क्लेम की रसीद और दस्तावेजों की कमी: क्लेम जमा होने पर उसकी पावती देने और दस्तावेजों में कमी होने पर इसकी जानकारी शुरुआत में ही देने की व्यवस्था की गई है।

निवेशकों को अभी क्या करना चाहिए?

म्यूचुअल फंड निवेशकों को अपने सभी फोलियो में नॉमिनी की जानकारी जांचनी चाहिए। साथ ही, परिवार के किसी विश्वसनीय सदस्य को निवेश से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित AMC की जानकारी उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है।

अगर परिवार में किसी निवेशक की मृत्यु हो चुकी है, तो क्लेम करने से पहले संबंधित फंड हाउस या RTA से दस्तावेजों की सूची और लागू प्रक्रिया की पुष्टि कर लें।