सरकारी कर्मचारियों की नई मांग! 10 नहीं, हर 5 साल में लागू हो Pay Commission
New Delhi : 8th Pay Commission को लेकर कर्मचारी यूनियनों ने अपनी नई मांग सरकार के सामने रखी है। यूनियनों का कहना है कि वेतन आयोग की समीक्षा हर 10 साल के बजाय हर 5 साल में की जानी चाहिए, ताकि बढ़ती महंगाई के अनुसार कर्मचारियों को समय पर राहत मिल सके।
महंगाई के मुकाबले कम पड़ रही बढ़ोतरी
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में 10 साल का लंबा अंतराल होने के कारण कर्मचारियों की सैलरी महंगाई की रफ्तार से पीछे छूट जाती है। हाल ही में दिल्ली में वेतन आयोग के साथ हुई बैठक में यूनियनों ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
बढ़ता जा रहा वेतन अंतर
यूनियनों ने तर्क दिया कि लंबे अंतराल के कारण निचले स्तर के कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों के वेतन में बड़ा अंतर पैदा हो जाता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की सैलरी 20 हजार रुपये और किसी अधिकारी की सैलरी 2 लाख रुपये है, तो 5 प्रतिशत बढ़ोतरी पर कर्मचारी को केवल 1 हजार रुपये का फायदा होगा, जबकि अधिकारी की सैलरी में 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसे में समान प्रतिशत बढ़ोतरी के बावजूद वास्तविक लाभ में भारी अंतर दिखाई देता है।
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि पिछले वेतन आयोगों ने भी सुझाव दिया था कि सरकार को लंबे अंतराल के बजाय समय-समय पर वेतन समीक्षा की व्यवस्था अपनानी चाहिए।
दिल्ली में फिर होगी अहम बैठक
इसी बीच 8th Central Pay Commission से जुड़ी अहम बैठकों का दौर जारी है। 13 और 14 मई को दिल्ली में रक्षा मंत्रालय और रेलवे मंत्रालय से जुड़े कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनर्स के साथ महत्वपूर्ण बैठकें होने जा रही हैं।
इन बैठकों में कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, भत्तों और सेवा नियमों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।
NIC पोर्टल से करना होगा आवेदन
सरकार की ओर से आयोजित इन बैठकों में शामिल होने के लिए यूनियनों को NIC पोर्टल पर आवेदन करना होगा। मेमोरेंडम जमा करने के बाद यूनियनों को एक मेमो आईडी दी जाएगी, जिसके जरिए आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
महंगाई और वेतन असमानता को देखते हुए कर्मचारी यूनियन अब वेतन आयोग की अधिक नियमित समीक्षा की मांग कर रही हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आयोग की बैठकों में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
