तेल कीमतों में गिरावट से राहत के संकेत, जुलाई में सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल
Mumbai : अमेरिका-ईरान शांति समझौते की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसका असर भारतीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है और शेयर बाजार में भी तेजी देखने को मिली है। हालांकि आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम कब कम होंगे।
कच्चे तेल में गिरावट, रुपया हुआ मजबूत
शांति समझौते की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में नरमी आई है। इसके चलते भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 95.11 से 94.65 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपया और मजबूत हो सकता है, जिससे तेल आयात की लागत कम होगी।
शेयर बाजार में भी दिखा सकारात्मक असर
तेल कीमतों में नरमी की खबर से शेयर बाजार में भी उत्साह देखने को मिला। तेल-गैस, बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी और प्रमुख सूचकांकों में करीब 2 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।
पेट्रोल-डीजल पर कब मिलेगी राहत?
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल के दामों में तत्काल कमी की संभावना नहीं है। तेल कंपनियां आमतौर पर 15 दिन के अंतराल पर कीमतों की समीक्षा करती हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो जुलाई के पहले सप्ताह में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की राहत मिल सकती है।
LPG सिलेंडर भी हो सकता है सस्ता
रसोई गैस उपभोक्ताओं को भी जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें कम होने पर जुलाई के पहले सप्ताह में घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 30 से 50 रुपये तक की कटौती संभव मानी जा रही है।
महंगाई पर भी पड़ेगा असर
कच्चे तेल की कीमतों में कमी का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत घटने से खाद्य पदार्थों, दैनिक उपयोग के सामान और अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी धीरे-धीरे नरमी आ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका वास्तविक असर अक्टूबर से दिसंबर के बीच दिखाई देना शुरू हो सकता है।
हालांकि राहत की उम्मीद के बीच कुछ चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता, वैश्विक सप्लाई चेन की बहाली और सरकार की कर नीति जैसे कारक आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय करेंगे।
आम जनता को कब मिलेगी सबसे बड़ी राहत?
विशेषज्ञों के अनुसार राहत तीन चरणों में देखने को मिल सकती है—
- जुलाई-अगस्त : पेट्रोल-डीजल और एलपीजी में शुरुआती राहत।
- अगस्त-सितंबर : थोक बाजार में लागत कम होने का असर।
- अक्टूबर-दिसंबर : खाद्य पदार्थों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में नरमी।
फिलहाल शांति समझौते ने राहत की उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन पेट्रोल-डीजल और महंगाई में बड़ी कमी देखने के लिए लोगों को अभी कुछ सप्ताह या महीने इंतजार करना पड़ सकता है।
