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8th Pay Commission से पहले रेलवे कर्मचारियों का अल्टीमेटम, DA-HRA बदलाव की मांग

 
8th Pay Commission से पहले रेलवे कर्मचारियों का अल्टीमेटम, DA-HRA बदलाव की मांग
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New Delhi : 8वें वेतन आयोग के गठन की चर्चाओं के बीच रेलवे कर्मचारियों की मांगों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इंडियन रेलवे टेक्नीकल सुपरवाइजर एसोसिएशन (Indian Railway Technical Supervisors Association) और अन्य रेलवे यूनियनों ने महंगाई भत्ते (DA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की गणना प्रणाली में व्यापक बदलाव की मांग की है।

यूनियनों का कहना है कि मौजूदा Consumer Price Index आधारित DA कैलकुलेशन में आधुनिक जरूरतों को शामिल नहीं किया गया है। उनका प्रस्ताव है कि इंटरनेट शुल्क, बोतलबंद पानी और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम जैसी जरूरी चीजों को भी बास्केट में जोड़ा जाए ताकि महंगाई का वास्तविक आकलन हो सके।

DA मर्जर और वेतन संशोधन की मांग

रेलवे यूनियनों ने यह भी मांग की है कि जब महंगाई भत्ता 50% तक पहुंच जाए तो उसे मूल वेतन में मिला दिया जाए। यह व्यवस्था पहले पांचवें वेतन आयोग के समय लागू थी। इसके अलावा फिटमेंट फैक्टर को 2.86 से बढ़ाकर 3.83 करने और न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपये से बढ़ाकर 52,600 से 69,000 रुपये के बीच करने की मांग रखी गई है।

HRA में चार-स्तरीय व्यवस्था का प्रस्ताव

वर्तमान में HRA तीन श्रेणियों (X, Y और Z शहर) में दिया जाता है। यूनियनों ने इसे बदलकर चार-स्तरीय ढांचा लागू करने का सुझाव दिया है—

- 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहर: 40% HRA

- 20–25 लाख आबादी: 30% HRA

- 5–20 लाख आबादी: 20% HRA

- 5 लाख से कम आबादी: 10% HRA

करियर प्रोग्रेशन और अन्य मांगें

यूनियनों ने ‘मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम’ में सुधार की मांग करते हुए 6, 12, 18, 24 और 30 साल की सेवा पर पांच वित्तीय अपग्रेड देने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही बच्चों के शिक्षा भत्ते (CEA) को 10,000 रुपये प्रतिमाह करने और इसे पोस्ट-ग्रेजुएशन तक जारी रखने की मांग की गई है।

लीव एनकैशमेंट में बदलाव की मांग

संगठन ने छुट्टी के बदले नकद भुगतान के नियमों में भी ढील देने की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार कर्मचारियों को सेवा के दौरान ही जमा छुट्टियों का कम से कम 50% नकद भुगतान मिलना चाहिए, जबकि रिटायरमेंट पर लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 600 दिन करने की मांग की गई है।

रेलवे यूनियनों का कहना है कि ये सभी बदलाव कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और करियर ग्रोथ को मजबूत करेंगे, जबकि केंद्र सरकार की ओर से इन मांगों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।