RBI का बड़ा एक्शन, इस बैंक का लाइसेंस किया रद्द, जानें क्यों
Updated: May 12, 2026, 21:03 IST
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया। आरबीआई ने बैंक की खराब वित्तीय स्थिति, अपर्याप्त पूंजी और बैंकिंग नियमों के पालन में लगातार विफल रहने को इस कार्रवाई की मुख्य वजह बताया है। RBI के आदेश के बाद बैंक 12 मई 2026 से सभी बैंकिंग सेवाएं बंद कर देगा।
आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने और एक लिक्विडेटर नियुक्त करने का भी अनुरोध किया है। अब बैंक किसी भी तरह का बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकेगा।
क्यों लिया गया बड़ा फैसला?
RBI के मुताबिक, बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं बची थी और उसकी कमाई की संभावनाएं भी बेहद कमजोर हो चुकी थीं। इसके अलावा बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के कई नियमों का पालन करने में असफल रहा। केंद्रीय बैंक का कहना है कि ऐसी स्थिति में बैंक को आगे संचालन की अनुमति देना जमाकर्ताओं और जनहित दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता था।
आरबीआई ने यह भी कहा कि मौजूदा वित्तीय हालत में बैंक अपने ग्राहकों की जमा राशि लौटाने की स्थिति में नहीं था। इसी वजह से बैंक का लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया।
ग्राहकों को कितनी राहत मिलेगी?
हालांकि बैंक बंद होने के बाद भी ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी। RBI ने बताया कि जमाकर्ता जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) के तहत 5 लाख रुपये तक की बीमित राशि पाने के हकदार होंगे।
बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता अपनी पूरी जमा राशि DICGC के जरिए वापस पाने के पात्र हैं। DICGC ने 31 मार्च 2026 तक बीमित जमाओं के तहत करीब 26.72 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया है।
अब आगे क्या होगा?
लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक पर तत्काल प्रभाव से जमा स्वीकार करने, पैसे निकालने और अन्य बैंकिंग सेवाएं देने पर रोक लग गई है। अब बैंक के परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके बाद ग्राहकों को नियमों के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने और एक लिक्विडेटर नियुक्त करने का भी अनुरोध किया है। अब बैंक किसी भी तरह का बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकेगा।
क्यों लिया गया बड़ा फैसला?
RBI के मुताबिक, बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं बची थी और उसकी कमाई की संभावनाएं भी बेहद कमजोर हो चुकी थीं। इसके अलावा बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के कई नियमों का पालन करने में असफल रहा। केंद्रीय बैंक का कहना है कि ऐसी स्थिति में बैंक को आगे संचालन की अनुमति देना जमाकर्ताओं और जनहित दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता था।
आरबीआई ने यह भी कहा कि मौजूदा वित्तीय हालत में बैंक अपने ग्राहकों की जमा राशि लौटाने की स्थिति में नहीं था। इसी वजह से बैंक का लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया।
ग्राहकों को कितनी राहत मिलेगी?
हालांकि बैंक बंद होने के बाद भी ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी। RBI ने बताया कि जमाकर्ता जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) के तहत 5 लाख रुपये तक की बीमित राशि पाने के हकदार होंगे।
बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता अपनी पूरी जमा राशि DICGC के जरिए वापस पाने के पात्र हैं। DICGC ने 31 मार्च 2026 तक बीमित जमाओं के तहत करीब 26.72 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया है।
अब आगे क्या होगा?
लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक पर तत्काल प्रभाव से जमा स्वीकार करने, पैसे निकालने और अन्य बैंकिंग सेवाएं देने पर रोक लग गई है। अब बैंक के परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके बाद ग्राहकों को नियमों के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
