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RBI की MPC बैठक शुरू, रेपो रेट 6.50% पर रहने के आसार

 
RBI की MPC बैठक शुरू, रेपो रेट 6.50% पर रहने के आसार
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Mumbai : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज 4 फरवरी से शुरू हो गई है, जो 6 फरवरी तक चलेगी। इस बैठक में रेपो रेट (वर्तमान में 6.50%) पर फैसला लिया जाएगा। अधिकांश अर्थशास्त्रियों और ब्रोकरेज हाउसेज का अनुमान है कि RBI इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और 'न्यूट्रल' स्टांस बनाए रखेगा।

एक्सपर्ट्स की राय और कारण  

बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, "इस महीने CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) और GDP की नई सीरीज जारी होने वाली है। इनमें महंगाई और GDP ग्रोथ मौजूदा स्तर से थोड़ी ज्यादा दिख सकती है। इसलिए MPC रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा।"

ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने भी अपनी पिछली 'रेट कट' की उम्मीद को 'होल्ड' में बदल दिया है। BofA के अनुसार,  
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील हो चुकी है, जिससे ग्रोथ आउटलुक में निश्चितता बढ़ी है।  
- ट्रेड डील पहले अनिश्चितता का बड़ा स्रोत थी, लेकिन अब ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए रेट कट की जरूरत कम हो गई है।  
- RBI अब रेट कट साइकिल को रोक सकता है, लेकिन लिक्विडिटी मैनेजमेंट के जरिए रेट ट्रांसमिशन को एक्टिव रखेगा।

रेपो रेट कटौती कब और क्यों होती है?

RBI रेपो रेट कम करता है ताकि:  
- बैंकों को सस्ता पैसा मिले, जिससे लोन की ब्याज दरें घटें।  
- निवेश बढ़े, सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़े और आर्थिक गतिविधियां तेज हों।  

लेकिन इस बार कटौती की संभावना कम है क्योंकि:  

- देश की GDP ग्रोथ 7.3% के मजबूत स्तर पर बनी हुई है।  
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील से इकोनॉमी को अतिरिक्त सपोर्ट मिला है।  
- महंगाई (CPI) काबू में है और नीचे की ओर ट्रेंड दिखा रही है।  

वर्तमान स्थिति 

- रेपो रेट: 6.50% (अक्टूबर 2024 से स्थिर)  
- MPC का स्टांस: न्यूट्रल (फरवरी 2025 से)  
- पिछली बैठक (दिसंबर 2025): रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, लिक्विडिटी को बैलेंस्ड रखने पर फोकस।  

आगे क्या? 

MPC बैठक के नतीजे 6 फरवरी को शाम 5 बजे घोषित किए जाएंगे। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस में फैसले की वजहें बताएंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट 'होल्ड' रहने पर शेयर बाजार और बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आएगी, जबकि अगली कटौती अप्रैल-जून 2026 में संभव हो सकती है, अगर महंगाई और ग्रोथ ट्रेंड अनुकूल रहे।