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RBI की नई नीति से विदेशी निवेश को मिलेगा बढ़ावा, सरकारी संस्थानों के लिए विदेश से कर्ज लेना होगा आसान

 
RBI की नई नीति से बढ़ेगा विदेशी निवेश, सरकारी संस्थानों की फंडिंग होगी आसान
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New Delhi : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकारी वित्तीय संस्थानों के लिए विदेश से कर्ज जुटाने की प्रक्रिया को आसान और कम खर्चीला बनाने के उद्देश्य से नई कंसेशनल फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की है। रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि इस कदम से विदेशी पूंजी आकर्षित होगी, देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

30 सितंबर तक मिलेगी विशेष सुविधा

RBI ने पिछले महीने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए यह विशेष फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू की थी। इसके तहत 30 सितंबर 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की कंपनियां यदि एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के माध्यम से विदेश से कर्ज जुटाती हैं, तो उन्हें 3 से 5 वर्ष की अवधि के लिए डॉलर-रुपया स्वैप पर मात्र 1.5 प्रतिशत वार्षिक प्रीमियम देना होगा।

S&P ने बताया बड़ा फायदा

S&P ग्लोबल रेटिंग्स की विश्लेषक गीता चुघ के अनुसार, यह पहल सरकारी वित्तीय संस्थानों को विदेश से कम लागत पर कर्ज लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और रुपये को भी स्थिरता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि इस पूंजी का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए किया जाएगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

विदेशी मुद्रा जोखिम होगा कम

S&P की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव (Currency Risk) का जोखिम बेहद कम लागत पर समाप्त किया जा सकेगा। इससे सरकारी वित्तीय संस्थानों की फंडिंग लागत घटेगी और वे अधिक मात्रा में विदेशी कर्ज जुटाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की यह नई व्यवस्था न केवल सरकारी वित्तीय संस्थानों की उधारी लागत कम करेगी, बल्कि विदेशी निवेश को बढ़ावा देकर देश की वित्तीय प्रणाली को भी मजबूत बनाएगी। इससे दीर्घकाल में बुनियादी ढांचा, विकास परियोजनाओं और आर्थिक वृद्धि को भी गति मिलने की उम्मीद है।