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प्रॉपर्टी बेचने वालों को राहत! ITAT बोला- खरीदार की गलती का नुकसान नहीं उठाएगा विक्रेता

 
प्रॉपर्टी बेचने वालों को राहत! ITAT बोला- खरीदार की गलती का नुकसान नहीं उठाएगा विक्रेता
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Mumbai : आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) दिल्ली ने एक अहम फैसले में कहा है कि प्रॉपर्टी बिक्री के मामलों में विक्रेता को TDS का क्रेडिट उसी असेसमेंट ईयर में मिलना चाहिए, जिसमें उसने आय (कैपिटल गेन) दिखाया है, भले ही खरीदार ने TDS किसी दूसरे साल में जमा किया हो।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक NRI विक्रेता से जुड़ा है, जिसने सितंबर 2021 में करीब 94.06 लाख रुपये में प्रॉपर्टी बेची। खरीदार ने 20.99 लाख रुपये का TDS काटा, लेकिन इसे गलत असेसमेंट ईयर (AY 2023-24) में जमा कर दिया।

विक्रेता ने AY 2022-23 के लिए ITR दाखिल करते हुए पूरा कैपिटल गेन दिखाया और TDS क्रेडिट का दावा किया, लेकिन आयकर विभाग ने पूरा क्रेडिट देने से इनकार कर दिया।

आयकर विभाग ने क्या किया?

आयकर विभाग, भारत के सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) ने 21.6 लाख रुपये के दावे में से सिर्फ 60,872 रुपये का TDS क्रेडिट मंजूर किया और बाकी 20.99 लाख रुपये का क्रेडिट खारिज कर दिया।

ITAT का फैसला

ITAT ने 12 नवंबर 2025 को अपने फैसले में कहा कि:

- कैपिटल गेन उसी साल टैक्सेबल होता है, जिस साल प्रॉपर्टी की बिक्री हुई।

- ऐसे में Matching Principle लागू होगा।

- आय जिस साल दिखाई गई है, उसी साल TDS का क्रेडिट मिलना चाहिए।

ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि खरीदार की गलती (गलत साल में TDS जमा करना) का नुकसान विक्रेता को नहीं उठाना चाहिए।

Form 71 क्या है?

Form 71 एक ऐसा विकल्प है, जिससे TDS की गलत एंट्री को सही असेसमेंट ईयर में ट्रांसफर कराया जा सकता है।

- अगर TDS गलत साल में जमा हुआ है,

- तो इस फॉर्म के जरिए उसे सही साल के Form 26AS में अपडेट कराकर

- विक्रेता को उसका क्रेडिट और रिफंड मिल सकता है।

क्या है इसका असर?

यह फैसला उन टैक्सपेयर्स के लिए राहतभरा है, जिनके मामलों में खरीदार की गलती से TDS गलत साल में जमा हो जाता है। अब ऐसे मामलों में विक्रेता को उचित टैक्स क्रेडिट मिलने का रास्ता साफ हो गया है।