रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसली चांदी, 4 लाख से 3 लाख पर आई कीमत
Mumbai : चांदी की कीमतों में आज गुरुवार को जबरदस्त गिरावट देखी गई। MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर भारतीय समयानुसार सुबह 9:36 बजे चांदी का भाव 2,46,257 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 8.4% कम है। दिन की शुरुआत 2,52,719 रुपये पर हुई थी, लेकिन खुलते ही तेज बिकवाली ने कीमतों को नीचे धकेल दिया।
रिटेल बाजार में भी यही ट्रेंड दिखा। एक दिन पहले बुधवार को चांदी प्रति ग्राम 320 रुपये और प्रति किलो 3,20,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन आज प्रति किलो 20,000 रुपये की गिरावट के बाद अब यह 3,00,000 रुपये प्रति किलो और प्रति ग्राम 300 रुपये पर आ गई है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर जैसे प्रमुख शहरों में आज 1 ग्राम चांदी 300 रुपये, 100 ग्राम 30,000 रुपये और 1 किलो 3,00,000 रुपये पर ट्रेड हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट
कॉमेक्स (COMEX) पर चांदी का भाव 81 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जो पिछली क्लोजिंग से 3.74% कम है। हालांकि, हाल के दिनों में चांदी में 25% तक का उछाल भी आया था, जिसके बाद यह करेक्शन देखा जा रहा है। जनवरी 2026 में चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई थी, लेकिन अब तेज गिरावट का दौर शुरू हो गया है।
गिरावट के मुख्य कारण
1. अमेरिकी डॉलर की मजबूती — अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) अब 98 के स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। जनवरी के अंत में यह चार साल के निचले स्तर पर था, लेकिन अब तेजी आई है।
- डॉलर और कीमती धातुओं (सोना-चांदी) के बीच उल्टा संबंध होता है। डॉलर मजबूत होने पर चांदी महंगी हो जाती है (क्योंकि कीमत डॉलर में तय होती है), जिससे गैर-अमेरिकी खरीदारों की मांग कम होती है और कीमतें गिरती हैं।
- निवेशक डॉलर जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स की ओर शिफ्ट कर रहे हैं, जबकि चांदी एक गैर-ब्याज वाला एसेट है।
2. सेफ-हेवन डिमांड में कमी — अरब सागर में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण पहले सेफ-हेवन डिमांड बढ़ी थी, लेकिन अब बाजार शुक्रवार को होने वाली परमाणु वार्ता के नए दौर का इंतजार कर रहा है। अगर वार्ता सकारात्मक रही तो तनाव कम होगा और सेफ-हेवन एसेट्स की मांग घटेगी।
3. मार्केट सेंटीमेंट — बुधवार को आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की और अब करेक्शन का दौर चल रहा है। चांदी में हाल के महीनों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर डॉलर इंडेक्स 98 से ऊपर टिकता है और परमाणु वार्ता से तनाव कम होता है, तो चांदी में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, अगर वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है या डॉलर कमजोर होता है, तो चांदी में रिकवरी संभव है।
