भारत में प्रॉपर्टी खरीदते समय महिलाओं को मिल रहे विशेष फायदे: स्टांप ड्यूटी से लेकर होम लोन तक बचत
नई दिल्ली I आज के समय में भारत में घर खरीदने का फैसला सिर्फ बजट और लोकेशन पर नहीं टिकता, बल्कि खरीदार का नाम भी काफी अहम हो गया है। खासकर महिलाओं के नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्ट्री कराने पर सरकार, बैंक और डेवलपर्स की तरफ से कई आकर्षक इंसेंटिव मिल रहे हैं, जो सीधे उनकी जेब पर सकारात्मक असर डालते हैं। ये फायदे शुरुआती खर्च से लेकर लंबे समय तक चलने वाली बचत तक फैले हुए हैं, जिससे महिलाओं को घर खरीदना ज्यादा स्मार्ट और फायदेमंद विकल्प बन गया है।
स्टांप ड्यूटी में बड़ी छूट
महिलाओं को सबसे बड़ा लाभ स्टांप ड्यूटी में मिलता है। कई राज्यों में महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर पुरुषों की तुलना में 1% से 2% तक कम स्टांप ड्यूटी ली जाती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में महिलाओं के लिए 4% जबकि पुरुषों के लिए 6%, उत्तर प्रदेश में 1% छूट (1 करोड़ तक की संपत्ति पर), महाराष्ट्र में भी 1% की रियायत मिल रही है। महंगे घरों में यह फर्क हजारों से लाखों रुपये तक पहुंच जाता है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि यूपी में महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री बढ़ रही है, जहां दिसंबर 2025 में हजारों महिलाओं ने इस छूट का फायदा उठाया।
होम लोन पर कम ब्याज दर
बैंकों ने भी महिलाओं को प्राथमिकता दी है। कई प्रमुख बैंक जैसे SBI, PNB, Union Bank, Bank of Baroda और HDFC महिलाओं को होम लोन पर 0.05% से 0.50% तक की ब्याज दर छूट देते हैं। भले ही यह फर्क छोटा लगे, लेकिन 20-30 साल के लोन में यह बड़ी बचत बन जाता है – EMI कम होती है और कुल ब्याज भुगतान में लाखों की कमी आती है। महिलाओं को प्राथमिक आवेदक बनाने पर लोन अप्रूवल भी आसान हो जाता है।
सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-Urban) जैसी स्कीम्स में महिलाओं की हिस्सेदारी को स्पेशल प्राथमिकता दी जाती है। घर महिला के नाम या जॉइंट ओनरशिप में होना जरूरी होता है, जिससे सब्सिडी (कई मामलों में 2.67 लाख तक) मिलती है और लोन का बोझ काफी कम हो जाता है। योजना में विधवाओं, दिव्यांगों और महिलाओं को ओवरराइडिंग प्राथमिकता मिलती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए घर खरीदना आसान बनाती है।
प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य रियायतें
कुछ राज्यों और नगर निगमों में महिलाओं के नाम पर दर्ज प्रॉपर्टी पर प्रॉपर्टी टैक्स में भी छूट या रियायत दी जाती है। यह साल-दर-साल बचत बनकर सामने आती है और घर के मेंटेनेंस खर्च को हल्का करती है। साथ ही, इनकम टैक्स में सेक्शन 80C और 24(b) के तहत महिलाएं भी पुरुषों की तरह डिडक्शन क्लेम कर सकती हैं, और जॉइंट लोन में दोनों को फायदा मिलता है।
डेवलपर्स के स्पेशल ऑफर्स
रियल एस्टेट डेवलपर्स अब महिलाओं को प्रमुख बायर कैटेगरी मानते हैं। वे खास ऑफर्स लॉन्च करते हैं – जैसे रजिस्ट्री फ्री, प्रोसेसिंग फीस माफ, इंटीरियर डिस्काउंट, फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान या लॉन्च पर रिजर्व्ड यूनिट्स। फेस्टिव सीजन या महिला दिवस पर ये ऑफर्स और बढ़ जाते हैं, जिससे महिलाओं के लिए घर खरीदना और आकर्षक हो जाता है।
कुल मिलाकर, महिला के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदना अब सिर्फ सुरक्षा का सवाल नहीं रहा, बल्कि एक स्मार्ट फाइनेंशियल मूव बन गया है। परिवार भी इस दिशा में बढ़ रहे हैं, क्योंकि इससे शुरुआती खर्च, लोन EMI और टैक्स में बहुस्तरीय बचत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये इंसेंटिव महिलाओं की आर्थिक मजबूती और संपत्ति स्वामित्व बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यदि आप घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो महिला के नाम पर रजिस्ट्री करने के फायदों को जरूर ध्यान में रखें।
