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Stock Market Crash: एक झटके में डूबे 6 लाख करोड़, जानिए सोमवार के क्रैश की 5 बड़ी वजहें

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1100 अंक टूटा जबकि निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए। ट्रंप-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, पीएम मोदी की ईंधन बचाने की अपील और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में भारी दबाव दिखा।

 
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Stock Market Crash: सोमवार 11 मई को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद खराब रही, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1100 अंक से अधिक फिसलकर 76,226 तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 314 अंक गिरकर 23,862 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 6 लाख करोड़ रुपये घटकर 467 लाख करोड़ रुपये रह गया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी बड़े शेयर लाल निशान में दिखाई दिए। टाइटन के शेयरों में सबसे ज्यादा 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं इंडिगो, एसबीआई, एमएंडएम, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल और अन्य दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी 2 से 4 प्रतिशत तक कमजोरी देखने को मिली।

बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या रही?

विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में अचानक आई इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरान ने अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी थीं, जिनमें युद्ध क्षति का मुआवजा, होर्मुज स्ट्रेट पर अधिकार और प्रतिबंध हटाने जैसी मांगें शामिल थीं। लेकिन ट्रंप ने इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दिया।

कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 105.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 5 प्रतिशत चढ़कर 99.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय है। इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।

पीएम मोदी की अपील का भी बाजार पर असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और उद्योगों से ईंधन बचाने की अपील की। उन्होंने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने और गैर जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने का आग्रह किया।

पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश को विदेशी मुद्रा बचाने पर विशेष जोर देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद पेट्रोलियम, एयरलाइंस, होटल, ट्रैवल और ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया

बाजार में बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रुपया भी कमजोर हो गया। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4 प्रतिशत गिरकर 94.88 पर खुला। इससे पहले यह 94.48 पर बंद हुआ था। तेल कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ाया।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

एनएसई के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बिकवाली करते नजर आए। शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय बाजार से 4,111 करोड़ रुपये की निकासी की थी। लगातार विदेशी बिकवाली से बाजार का सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है।

इंडिया VIX में उछाल, बढ़ी निवेशकों की घबराहट

बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX भी करीब 10 प्रतिशत उछलकर 18.50 के स्तर पर पहुंच गया। इसे बाजार में बढ़ती घबराहट और अनिश्चितता का संकेत माना जाता है। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जिसमें निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे ज्यादा करीब 3 प्रतिशत टूटा।

एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि बाजार पर इस समय दोहरा दबाव है। पहला पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और दूसरा घरेलू स्तर पर ईंधन बचत को लेकर सरकार की अपील।

उनके मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। वहीं ईंधन, सोना, उर्वरक और यात्रा खर्च कम करने की अपील का असर कई सेक्टरों की ग्रोथ पर पड़ सकता है।

आगे बाजार में क्या रहेगा नजर?

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। अगर पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है।