Essel Group पर 45,000 करोड़ का कर्ज, 43,000 करोड़ चुकाने का दावा… फिर 22,006 करोड़ की NCLT कहानी क्या है?
Essel Group के चेयरमैन सुभाष चंद्र ने अपनी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही और ₹22,006 करोड़ के दावों पर सफाई दी है। उनका कहना है कि समूह ने करीब ₹45,000 करोड़ की देनदारी में से ₹43,000 करोड़ चुका दिए हैं। उन्होंने कर्ज और भुगतान की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है।
Essel Group Debt: Essel Group के चेयरमैन सुभाष चंद्र ने अपनी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी है। उन्होंने दावा किया है कि 2019 में सामने आए वित्तीय संकट के समय समूह पर करीब ₹45,000 करोड़ की देनदारी थी, जिसमें से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। चंद्र के मुताबिक, इस दौरान परिवार की संपत्तियां और यहां तक कि घर भी बेचने या गिरवी रखने की नौबत आई।
₹22,006 करोड़ के दावे पर क्या बोले सुभाष चंद्र?
सुभाष चंद्र ने उन रिपोर्टों पर भी सवाल उठाया जिनमें उनके खिलाफ करीब ₹22,006 करोड़ के दावों का जिक्र है। उनका कहना है कि यह रकम उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिया गया कर्ज नहीं है, बल्कि Essel Group से जुड़ी कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी गई पर्सनल गारंटी से जुड़े दावों का आंकड़ा है।
हालांकि, NCLT ने उनके मामले में करीब ₹22,006 करोड़ के admitted claims के मुकाबले लगभग ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली resolution plan को मंजूरी दी है। इस फैसले पर कुछ lenders ने आपत्ति जताई है और HDFC Bank ने फैसले को चुनौती देने की संभावना जताई है।
₹43,000 करोड़ भुगतान का दावा कैसे समझें?
चंद्र के मुताबिक, समूह पर संकट के समय करीब ₹45,000 करोड़ की देनदारी थी और इसमें से लगभग ₹43,000 करोड़ वापस किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि करीब ₹2,000 करोड़ की रकम अभी कुछ कंपनियों में asset-liability mismatch के कारण अटकी हुई है।
यही वजह है कि चंद्र ने अब स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि एक स्वतंत्र ऑडिटर यह स्पष्ट कर सकता है कि संकट के समय समूह ने कितना कर्ज लिया था, कितना भुगतान किया गया और अभी कितनी देनदारी बाकी है।
व्यक्तिगत संपत्ति को लेकर भी दी सफाई
सुभाष चंद्र ने अपनी कथित व्यक्तिगत संपत्ति को लेकर सामने आए आंकड़ों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि कई रिपोर्टों में Essel Group की कंपनियों की बाजार कीमत को उनकी व्यक्तिगत संपत्ति के तौर पर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि समूह का कारोबार और उनकी निजी संपत्ति अलग-अलग चीजें हैं।
NCLT की कार्यवाही में उनकी भूमिका मुख्य रूप से personal guarantor की है। वहीं, जिन कंपनियों ने मूल रूप से कर्ज लिया था, उनकी अपनी देनदारियां अलग बनी रहती हैं। सुभाष चंद्र ने बैंकिंग सिस्टम, वित्त मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों से स्वतंत्र ऑडिट कराने की अपील करते हुए कहा है कि इससे कर्ज, भुगतान और बाकी देनदारी की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
