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टाटा स्टील निवेशकों के रडार पर, रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद शेयरों में दबाव

टाटा स्टील ने Q3 में रिकॉर्ड उत्पादन और बिक्री दर्ज की है। कच्चा स्टील उत्पादन 12% बढ़ा, सप्लाई में भी मजबूत इजाफा हुआ। विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है, हालांकि गुरुवार को शेयरों में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई।

 
टाटा स्टील निवेशकों के रडार पर, रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद शेयरों में दबाव
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Mumbai : भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 जनवरी के कारोबारी सत्र के दौरान मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील निवेशकों के फोकस में बनी हुई है। कंपनी के हालिया कारोबारी आंकड़े इसके मजबूत होते प्रदर्शन की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शेयरों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली है।

Q3 में रिकॉर्ड उत्पादन और बिक्री

वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में टाटा स्टील ने अब तक का सबसे अधिक स्टील उत्पादन और बिक्री दर्ज की है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 63 लाख टन कच्चे स्टील का उत्पादन किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है।

देश में स्टील सप्लाई के मोर्चे पर भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया है। पिछली तिमाही की तुलना में सप्लाई में 9 प्रतिशत, जबकि सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्पादन में यह तेजी मुख्य रूप से जमशेदपुर और कलिंगनगर प्लांट में बढ़ी क्षमता के चलते आई है। दिसंबर 2025 तक कंपनी का कुल स्टील उत्पादन 6 प्रतिशत बढ़कर 17.2 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि

टाटा स्टील में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। ट्रेंडलाइन के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कंपनी के 77 लाख से अधिक शेयरों की खरीदारी की है। यह कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

बीएसई पर शेयरों का हाल

हालांकि मजबूत आंकड़ों के बावजूद गुरुवार के कारोबार में टाटा स्टील के शेयर दबाव में दिखे। बीएसई पर दोपहर करीब 12:10 बजे कंपनी के शेयर 1.93 प्रतिशत या 3.55 रुपये की गिरावट के साथ 180.20 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। शेयर ने दिन की शुरुआत 185.95 रुपये पर की थी। कंपनी का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 187.90 रुपये, जबकि न्यूनतम स्तर 122.60 रुपये रहा है।

कुल मिलाकर, मजबूत उत्पादन और विदेशी निवेशकों की भागीदारी के चलते टाटा स्टील की बुनियाद मजबूत दिख रही है, लेकिन अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव का असर शेयरों पर नजर आ रहा है।