भारत में ड्रोन डिलीवरी का बढ़ा दायरा, लेकिन नहीं जाएगी डिलीवरी राइडर्स की नौकरी; जानिए क्यों
नई दिल्ली। भारत के शहरों में ड्रोन अब केवल नई तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। दवाइयों, मेडिकल उपकरणों, ई-कॉमर्स पार्सल और जरूरी सामान की डिलीवरी में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, इस बदलाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ड्रोन लाखों डिलीवरी राइडर्स की नौकरियां छीन लेंगे? विशेषज्ञों का जवाब है—नहीं।
सरकार की ड्रोन नियम 2021, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना और डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म जैसी नीतियों ने ड्रोन तकनीक को प्रयोगशाला से निकालकर व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचा दिया है। यही वजह है कि अब देश में कई कंपनियां ड्रोन के जरिए तेज और किफायती डिलीवरी सेवाएं दे रही हैं।
क्यों बढ़ रही है ड्रोन डिलीवरी की मांग?
लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का क्विक-कॉमर्स (10 मिनट डिलीवरी) बाजार 10 अरब डॉलर से अधिक का हो चुका है। ऐसे में बढ़ते ट्रैफिक, ईंधन की कीमतों और डिलीवरी लागत को कम करने के लिए ड्रोन एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरे हैं।
ड्रोन खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम से प्रभावित नहीं होते, जिससे डिलीवरी का समय और लागत दोनों कम हो जाती हैं। इसका सबसे अधिक फायदा टियर-2 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को मिल रहा है, जहां दवाइयों और जरूरी सामान की समय पर आपूर्ति पहले बड़ी चुनौती थी।
क्या खतरे में हैं डिलीवरी राइडर्स?
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन फिलहाल इंसानी डिलीवरी कर्मचारियों का विकल्प नहीं बन सकते। ई-कॉमर्स सेक्टर में काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स सिर्फ पार्सल नहीं पहुंचाते, बल्कि पता सत्यापित करते हैं, कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) संभालते हैं और ग्राहकों की समस्याओं का मौके पर समाधान भी करते हैं।
यानी अंतिम मील (Last Mile) तक ग्राहक के दरवाजे पर सामान पहुंचाने की जिम्मेदारी अभी भी डिलीवरी राइडर्स के पास ही रहेगी। ड्रोन मुख्य रूप से मेडिकल सप्लाई, वेयरहाउस-टू-वेयरहाउस ट्रांसफर और विशेष परिस्थितियों में तेज डिलीवरी के लिए अधिक उपयोगी साबित होंगे।
ड्रोन से नए रोजगार भी बन रहे हैं
ड्रोन तकनीक के विस्तार के साथ नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इसमें रिमोट पायलट, मेंटेनेंस इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और ड्रोन ऑपरेशन विशेषज्ञ जैसी नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन मानव श्रम की जगह लेने के बजाय उसके पूरक के रूप में काम करेंगे।
2033 तक दोगुना हो सकता है लॉजिस्टिक्स बाजार
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, भारत का लॉजिस्टिक्स बाजार 2033 तक लगभग दोगुना हो सकता है। इस दौरान ड्रोन डिलीवरी विशेष रूप से अंतिम-मील संचालन और आवश्यक सेवाओं की तेज आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
क्या बोले उद्योग विशेषज्ञ?
एडजिस्टिफाई के सह-संस्थापक और सीईओ उमंग शुक्ला के अनुसार, भारत में ड्रोन डिलीवरी अब केवल प्रयोग नहीं रह गई है, बल्कि लॉजिस्टिक्स का भरोसेमंद हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि नियामकों ने चुनिंदा BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) कॉरिडोर को मंजूरी दी है और कई कंपनियां अब सीमित परीक्षण के बजाय बड़े पैमाने पर स्वायत्त ड्रोन डिलीवरी संचालन कर रही हैं।
