iPhone से Android तक… अब भारत में बनेंगे मोबाइल के जरूरी पार्ट्स, सरकार की बड़ी तैयारी, PLI 2.0 से बदलेगी तस्वीर
New Delhi : भारत सरकार देश को मोबाइल निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार मोबाइल निर्माण के लिए लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का नया संस्करण PLI 2.0 लाने की तैयारी कर रही है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण पुर्जों (कंपोनेंट्स) का निर्माण भारत में बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
सरकार की योजना है कि आने वाले समय में मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले कम से कम 55 प्रतिशत कंपोनेंट्स का निर्माण भारत में ही हो। वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 18 से 20 प्रतिशत के बीच है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार इस योजना को 40,000 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के साथ जोड़कर लागू कर सकती है। इसके तहत डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल, चिपसेट और लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
स्थानीय निर्माण पर रहेगा फोकस
वित्त मंत्रालय ने इस बात पर चिंता जताई है कि भारत मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अब भी कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भर है। इसी को देखते हुए PLI 2.0 में केवल उत्पादन और बिक्री बढ़ाने के बजाय *स्थानीय सोर्सिंग और कंपोनेंट निर्माण* को प्राथमिकता दी जाएगी।
नई नीति के तहत उन कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलने की संभावना है जो भारत में ही मोबाइल फोन के आवश्यक पार्ट्स का निर्माण करेंगी या घरेलू आपूर्तिकर्ताओं से खरीदारी करेंगी।
PLI योजना के अब तक के परिणाम
साल 2020 में शुरू की गई PLI योजना के तहत अब तक 32 कंपनियां निवेश, उत्पादन और निर्यात के निर्धारित लक्ष्य हासिल कर चुकी हैं। योजना के तहत अब तक:
- 17,519 करोड़ रुपये का निवेश
- 11.01 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन
- 6.27 लाख करोड़ रुपये का निर्यात
दर्ज किया जा चुका है।
75 नई फैक्ट्रियों से बढ़ेगा उत्पादन
सरकार को उम्मीद है कि ECMS योजना के तहत स्वीकृत 75 नई विनिर्माण इकाइयों में से कई इस वर्ष उत्पादन शुरू कर देंगी। इससे मोबाइल फोन के कंपोनेंट्स के घरेलू निर्माण को नई गति मिलेगी और भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि PLI 2.0 लागू होने के बाद भारत न केवल मोबाइल फोन असेंबली हब बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है।
