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6G की ओर भारत का बड़ा कदम: 600MHz बैंड की वैधता बढ़ी, स्पीड में आएगा बूस्ट
 

 
 6G की ओर भारत का बड़ा कदम: 600MHz बैंड की वैधता बढ़ी, स्पीड में आएगा बूस्ट
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नई दिल्ली। देश में अगली पीढ़ी की इंटरनेट तकनीक 6G को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने जानकारी दी है कि 600MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ा दी गई है। यह बैंड भविष्य में हाई-स्पीड इंटरनेट और मजबूत नेटवर्क कवरेज के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में तेजी से बढ़ती डेटा खपत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार और रेगुलेटर का लक्ष्य स्पेक्ट्रम की उपलब्धता बढ़ाकर नेटवर्क को अधिक सक्षम बनाना है, ताकि यूजर्स को बेहतर और स्थिर कनेक्टिविटी मिल सके।

स्पेक्ट्रम शेयरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

TRAI ने स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग के लिए इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को लीज पर देने जैसे अहम सुझाव दिए हैं। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करना अनिवार्य होगा, जबकि निजी कंपनियां अपनी सुविधाएं स्वेच्छा से साझा कर सकेंगी। इससे नेटवर्क लागत कम होगी और कवरेज में सुधार आएगा।

प्राइवेट 5G नेटवर्क को बढ़ावा

रेगुलेटर ने कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क (CNPN) के लिए गाइडलाइन जारी की है, जिससे कंपनियां अपने निजी 5G नेटवर्क स्थापित कर सकें। हालांकि, इस क्षेत्र में अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिली है और इसे आगे बढ़ाने के लिए बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई है।

TRAI चेयरमैन के अनुसार, आने वाले समय में केवल मोबाइल नेटवर्क डेटा की मांग को पूरा नहीं कर पाएंगे। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग से नेटवर्क पर दबाव और बढ़ेगा, जिससे नई तकनीकों की जरूरत पड़ेगी।

रिकॉर्ड ब्रॉडबैंड ग्रोथ

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर्स जुड़े, जो अब तक का रिकॉर्ड है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) का मिश्रित मॉडल अपनाने पर जोर दिया गया है।

हालांकि, इनडोर कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसे सुधारने के लिए TRAI ने सुझाव दिया है कि इमारतों के डिजाइन में ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया जाए, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है।

M2M और स्मार्ट टेक्नोलॉजी पर फोकस

देश के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्युनिकेशन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे स्मार्ट डिवाइस, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 को नई गति मिलेगी। कुल मिलाकर, 6G की दिशा में यह पहल भारत को डिजिटल सुपरपावर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।