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क्या AI छीन रहा है सोचने की ताकत? Gen-Z की याददाश्त और IQ पर न्यूरोसाइंटिस्ट ने बताई चौंकाने वाली वजह

 
क्या AI छीन रहा है सोचने की ताकत? Gen-Z की याददाश्त और IQ पर न्यूरोसाइंटिस्ट ने बताई चौंकाने वाली वजह
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New Delhi : क्या नई पीढ़ी पहले की तुलना में कम बुद्धिमान होती जा रही है? दुनिया के जाने-माने न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जेरेड कूनी होर्वाथ (Dr. Jared Cooney Horvath) का दावा है कि 1997 से 2010 के बीच जन्मी Gen-Z पहली ऐसी पीढ़ी है, जिसने अकादमिक प्रदर्शन और संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) क्षमता के कई पैमानों पर अपने माता-पिता की पीढ़ी से कमजोर प्रदर्शन किया है। उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ती निर्भरता इसके प्रमुख कारणों में शामिल है।

इन क्षेत्रों में पिछड़ रही है Gen-Z

डॉ. होर्वाथ के अनुसार, कई दशकों से कॉग्निटिव डेवलपमेंट पर किए जा रहे अध्ययनों में पहली बार ऐसा देखा गया है कि Gen-Z का प्रदर्शन कई महत्वपूर्ण क्षमताओं में पिछली पीढ़ियों से कमजोर रहा है। इनमें शामिल हैं:

- ध्यान केंद्रित करने की क्षमता (Attention)

- याददाश्त (Memory)

- पढ़ने-लिखने की क्षमता (Literacy)

- गणितीय कौशल (Math Skills)

- समस्या समाधान क्षमता (Problem Solving)

- सामान्य IQ

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति तब है, जब आज के छात्र पहले की तुलना में अधिक समय स्कूलों में बिता रहे हैं।

टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता बनी वजह

डॉ. होर्वाथ का मानना है कि टैबलेट, स्मार्टफोन और कंप्यूटर पर अत्यधिक निर्भरता ने पारंपरिक सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि छात्र किताबें पढ़ने के बजाय सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो देखकर विषयों की जानकारी लेने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि TikTok, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घंटों बिताने की आदत ने गहराई से पढ़ने और सोचने की क्षमता को प्रभावित किया है।

AI ने बदल दिया सीखने का तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार, Gen-Z पहली ऐसी पीढ़ी है जो AI के व्यापक उपयोग के दौर में बड़ी हुई है। आज AI कुछ ही सेकंड में किसी भी विषय को समझा सकता है, गणना कर सकता है, सारांश तैयार कर सकता है, डिजाइन बना सकता है और कोड भी लिख सकता है।

ऐसे में जब लगभग हर सवाल का जवाब एक प्रॉम्प्ट पर उपलब्ध है, तो जानकारी याद रखने और स्वयं विश्लेषण करने की आवश्यकता धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

हर तकनीकी बदलाव के साथ बदली है सीखने की प्रक्रिया

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल Gen-Z को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इतिहास में हर नई तकनीक ने सीखने के तरीके को बदला है।

- प्रिंटिंग प्रेस आने के बाद जानकारी याद रखने की आवश्यकता कम हुई।

- कैलकुलेटर ने मानसिक गणना की जगह ली।

- इंटरनेट ने जानकारी तक पहुंचने का तरीका पूरी तरह बदल दिया।

- अब AI ज्ञान प्राप्त करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया को नए स्तर पर ले जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनौती तकनीक का उपयोग नहीं, बल्कि उसके साथ आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking), विश्लेषण क्षमता और स्वतंत्र अध्ययन की आदत को बनाए रखने की है।