जिस दिन Microsoft का ग्रीन कार्ड प्रोग्राम सस्पेंड हुआ, उसी दिन ट्रंप ने सत्या नडेला को किया सम्मानित
Microsoft H1B Visa: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को Microsoft के CEO सत्या नडेला को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया। लेकिन इस समारोह से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने Microsoft के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का ऐलान किया था। कंपनी पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बाद विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने और वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए उसके रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड कार्यक्रम पर रोक लगाई गई।
एक ही दिन में हुई इन दो घटनाओं ने अमेरिकी प्रशासन की इमिग्रेशन नीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर ट्रंप विदेशी मूल के टेक्नोलॉजी दिग्गजों के योगदान की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनका प्रशासन विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े कार्यक्रमों पर सख्ती बढ़ा रहा है। (India Today)
ट्रंप ने सत्या नडेला को क्यों किया सम्मानित?
व्हाइट हाउस में आयोजित समारोह के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने Microsoft CEO सत्या नडेला को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन प्रदान किया। यह सम्मान टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है।
ट्रंप ने Microsoft के विकास और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नडेला की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि नडेला ने तीन दशकों से अधिक समय तक कंपनी के बदलाव में अहम योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में Microsoft के सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाओं का इस्तेमाल दुनिया भर में कारोबार, शिक्षा और आम लोगों की जरूरतों के लिए किया जा रहा है।
इस समारोह में तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियों को भी सम्मानित किया गया। इनमें SpaceX के CEO एलन मस्क, Google के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन, Nvidia के CEO जेनसन हुआंग, AMD की CEO लिसा सु और Dell Technologies के CEO माइकल डेल शामिल थे। नडेला भारत से अमेरिका आए थे, जबकि सम्मान पाने वाले अन्य कई प्रमुख टेक्नोलॉजी नेता भी अमेरिका के बाहर जन्मे हैं।
सम्मान समारोह से पहले JD Vance ने Microsoft पर क्या आरोप लगाए?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि Microsoft ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बावजूद विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए वीजा व्यवस्था का इस्तेमाल किया। उन्होंने कंपनी पर आरोप लगाया कि वह अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर रही है।
Vance के मुताबिक, Microsoft ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि इसी अवधि में कंपनी को लगभग 6,300 H-1B वीजा मिले और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड हासिल हुए। उन्होंने इन आंकड़ों को कंपनी की भर्ती नीति पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया।
हालांकि, ये आंकड़े और आरोप अमेरिकी प्रशासन की ओर से पेश किए गए हैं। इन्हें अपने आप में इस बात का स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता कि हर वीजा या ग्रीन कार्ड का इस्तेमाल छंटनी किए गए कर्मचारी की जगह किसी विदेशी कर्मचारी को रखने के लिए हुआ।
Vance ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों को देश के कर्मचारियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके मुताबिक, सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी रोकना और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। (AP News)
Microsoft के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम पर क्या रोक लगी है?
अमेरिकी प्रशासन ने Microsoft को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होने वाले PERM यानी Permanent Labor Certification कार्यक्रम से सस्पेंड करने की घोषणा की है। इस प्रक्रिया के तहत कंपनियां योग्य विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने के लिए प्रायोजन कर सकती हैं।
PERM प्रक्रिया में नियोक्ता को यह दिखाना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए पर्याप्त योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं हैं तथा विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से समान काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
इस रोक का मतलब यह नहीं है कि Microsoft के सभी विदेशी कर्मचारियों के H-1B वीजा तत्काल रद्द हो गए हैं। कार्रवाई मुख्य रूप से कंपनी के माध्यम से रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। जिन कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया इसी रास्ते पर निर्भर है, उन्हें देरी या अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
क्या इस फैसले से भारतीय IT कर्मचारियों पर असर पड़ेगा?
Microsoft में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो कंपनी के जरिए अमेरिका में स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया में हैं। PERM आवेदन स्वीकार नहीं होने या लंबित आवेदन आगे न बढ़ने की स्थिति में उनके ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड अलग-अलग इमिग्रेशन प्रक्रियाएं हैं। H-1B वीजा विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में निर्धारित शर्तों के तहत काम करने की अनुमति देता है, जबकि ग्रीन कार्ड स्थायी निवास का दर्जा देता है। इसलिए PERM प्रक्रिया पर रोक को सभी भारतीय कर्मचारियों के वीजा रद्द होने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
अमेरिकी प्रशासन ने Microsoft के साथ Adobe और कुछ बड़ी IT सेवा कंपनियों को भी इस कार्रवाई के दायरे में रखा है। इससे रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए नियोक्ता पर निर्भर विदेशी कर्मचारियों की चिंताएं बढ़ सकती हैं। (Reuters)
एक ही दिन में दो अलग संदेश
सत्या नडेला को सम्मानित करने और Microsoft के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा के बीच का अंतर अमेरिकी प्रशासन की नीति में मौजूद तनाव को सामने लाता है। ट्रंप प्रशासन एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी में अमेरिका की वैश्विक बढ़त बनाए रखने के लिए बड़ी कंपनियों और उनके नेताओं की भूमिका की सराहना कर रहा है। दूसरी ओर, विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।
इस पूरे मामले में Microsoft पर लगाए गए आरोपों और कंपनी की इमिग्रेशन प्रक्रिया पर लगी रोक का आगे क्या असर होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों के रोजगार और स्थायी निवास से जुड़ी प्रक्रियाओं की जांच तेज कर दी है।
