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अब AI तय करेगा युद्ध का निशाना! Israel के Gospel सिस्टम ने दुनिया को चौंकाया

 
अब AI तय करेगा युद्ध का निशाना! Israel के Gospel सिस्टम ने दुनिया को चौंकाया
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New Delhi : मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल दिया है। जहां पहले खुफिया जानकारी जुटाने और संभावित टारगेट पहचानने में इंसानों को महीनों लग जाते थे, वहीं अब यह काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बेहद तेजी से किया जा रहा है। इसी तकनीक का एक अहम उदाहरण इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा AI सिस्टम Unit 8200 और उससे जुड़ा टूल Habsora (The Gospel) है। यह सिस्टम बड़ी मात्रा में डेटा को कुछ ही समय में प्रोसेस कर युद्ध से जुड़े संभावित ठिकानों और गतिविधियों की पहचान करने में मदद करता है।

Gospel AI सिस्टम क्या है?  

Gospel एक एडवांस डेटा-एनालिसिस प्लेटफॉर्म है, जिसे IDF के लिए विकसित किया गया है। इसका मुख्य काम अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली सूचनाओं का विश्लेषण करके संभावित सैन्य टारगेट की पहचान करना है। इसकी खासियत इसकी स्पीड और डेटा प्रोसेसिंग क्षमता है। पारंपरिक तरीके से खुफिया टीम को किसी लक्ष्य की पुष्टि करने में काफी समय लगता था, वहीं यह सिस्टम कुछ ही दिनों में सैकड़ों संभावित ठिकानों की पहचान कर सकता है। इसी वजह से इसे कई बार टारगेट फैक्ट्री भी कहा जाता है।

कैसे काम करता है Gospel?

सिस्टम कई प्रकार की जानकारी को एक साथ जोड़कर विश्लेषण करता है। इसमें शामिल हैं:

- सैटेलाइट तस्वीरें  

- ड्रोन से मिलने वाले लाइव वीडियो  

- इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल (फोन, रेडियो कम्युनिकेशन)  

- पहले से मौजूद खुफिया डेटाबेस  

इन सभी जानकारियों को मिलाकर सिस्टम यह अनुमान लगाने की कोशिश करता है कि किसी इलाके में कमांड सेंटर, हथियारों का भंडार या रॉकेट लॉन्चर जैसी सैन्य गतिविधियां मौजूद हैं या नहीं।

Lavender सिस्टम से जुड़ा नेटवर्क 

यह AI अकेले काम नहीं करता। इसके साथ एक अन्य सिस्टम Lavender का भी जिक्र किया जाता है, जो लोगों से जुड़े डेटा का विश्लेषण करके यह अनुमान लगाने की कोशिश करता है कि किसी व्यक्ति का संबंध संदिग्ध गतिविधियों से है या नहीं। इस तरह AI आधारित अलग-अलग सिस्टम मिलकर युद्ध में जानकारी जुटाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज बनाते हैं।

AI आधारित युद्ध पर उठ रहे सवाल

हालांकि इस तकनीक ने सैन्य रणनीति को पहले से ज्यादा तेज और प्रभावी बनाया है, लेकिन इसके साथ कई नैतिक और कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI सिस्टम डेटा के आधार पर निर्णय लेते हैं, लेकिन वे हमेशा जमीन पर मौजूद जटिल परिस्थितियों को पूरी तरह समझ नहीं पाते। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अगर किसी एल्गोरिदम की वजह से गलत टारगेट चुना जाता है या किसी नागरिक को नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो सकता है।

बदल रहा है आधुनिक युद्ध का चेहरा 

Gospel जैसे सिस्टम यह साबित करते हैं कि तकनीक की मदद से सैन्य रणनीति तेज हो सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़े नैतिक और सुरक्षा सवालों पर दुनिया भर में चर्चा जारी है। AI आधारित युद्ध अब डिजिटल और डेटा-आधारित हो रहे हैं।