अब दुश्मन की एयर डिफेंस फेल, झुंड में हमला करेगा भारत का ‘शेषनाग 150’
New Delhi : सऊदी अरब के रियाद में आयोजित World Defence Show 2026 के दौरान भारत के निजी रक्षा क्षेत्र ने एक ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (NewSpace Research and Technologies) ने 'शेषनाग 150' नामक स्वॉर्म ड्रोन को लॉइटरिंग म्युनिशन के रूप में पेश किया है। यह ड्रोन 1,000 किलोमीटर तक गहराई में हमला करने में सक्षम है और भारत की मानवरहित युद्ध क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।
शेषनाग 150 की प्रमुख विशेषताएं
- लंबी दूरी और भारी पेलोड : ड्रोन 25 से 40 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकता है। यह छोटे ड्रोन और महंगे क्रूज मिसाइलों के बीच की खाली जगह को भरता है।
- उड़ान अवधि : लगभग 5 घंटे (संकेत मिलता है कि इसमें छोटा इंजन इस्तेमाल हुआ है)।
- सटीकता : कंपनी का दावा है कि यह 5 मीटर के दायरे में सटीक वार कर सकता है। यदि परीक्षणों में यह सटीकता साबित होती है, तो इसे पारंपरिक गाइडेड मिसाइलों की श्रेणी में रखा जा सकता है।
- डिजाइन : डेल्टा-विंग ढांचा, जो स्थिर उड़ान और लंबी दूरी के लिए उपयुक्त है।
स्वॉर्म तकनीक से हमला
शेषनाग 150 की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वॉर्म (झुंड) में काम करने का मॉडल है। एक साथ छोड़े गए कई ड्रोन अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकते हैं:
- कुछ ड्रोन दुश्मन के रडार को भ्रमित करने के लिए डिकॉय का काम करेंगे।
- कुछ खुफिया जानकारी जुटाएंगे या संचार में बाधा डालेंगे।
- मुख्य हमलावर ड्रोन लक्ष्य पर सटीक वार करेंगे।
इस रणनीति से दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली पर एक साथ कई दिशाओं से दबाव बनता है, जिससे बचाव मुश्किल हो जाता है।
रणनीतिक महत्व
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली भारत की स्ट्राइक क्षमता में नई कड़ी जोड़ती है। क्रूज मिसाइलें महंगी और सीमित संख्या में होती हैं, जबकि पारंपरिक सामरिक ड्रोन लंबी दूरी तक नहीं पहुंच पाते। 1,000 किमी की मारक क्षमता के साथ कमांड सेंटर, एयर डिफेंस ठिकाने, गोला-बारूद डिपो और हवाई अड्डों जैसे रणनीतिक लक्ष्यों पर बिना पायलट जोखिम में डाले हमला संभव हो सकता है।
फिलहाल किसी आधिकारिक खरीद समझौते की घोषणा नहीं हुई है। यह कार्यक्रम निजी निवेश से विकसित किया गया है और निर्यात के लिए भी तैयार रखा गया है।
भारत की रक्षा तकनीक में नया अध्याय
World Defence Show 2026 में भारत के निजी क्षेत्र का यह प्रदर्शन 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम है। यह दर्शाता है कि अब भारत की मानवरहित युद्ध क्षमता सिर्फ सीमित सामरिक जरूरतों तक सीमित नहीं रह गई है।
