WhatsApp की End-to-End Encryption पर उठे सवाल, मैसेज पढ़ने का आरोप
वॉट्सऐप की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली End-to-End Encryption अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट में दायर क्लास एक्शन मुकदमे में दावा किया गया है कि वॉट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी Meta यूज़र्स के निजी मैसेज तक सीधी पहुंच रखती है, जबकि कंपनी लंबे समय से यह दावा करती आई है कि वह किसी भी मैसेज को पढ़ या एक्सेस नहीं कर सकती।
यह मुकदमा 23 जनवरी को US District Court, Northern District of California में दाखिल किया गया है। केस में भारत समेत कई देशों के वादी शामिल हैं। भारत से अलका गौर भी इस याचिका का हिस्सा हैं। याचिका में अप्रैल 2016 के बाद के सभी वॉट्सऐप यूज़र्स का प्रतिनिधित्व करने की मांग की गई है, हालांकि अमेरिका, कनाडा और यूरोप के यूज़र्स को इससे बाहर रखा गया है।
क्या हैं मुख्य आरोप?
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि वॉट्सऐप और Meta यूज़र्स के “निजी” मैसेज को न सिर्फ स्टोर कर सकते हैं, बल्कि उन्हें एनालाइज और एक्सेस भी किया जा सकता है। शिकायत के मुताबिक, Meta ने कथित तौर पर एक ‘kleptographic backdoor’ लागू किया है, जिसके जरिए कंपनी के कर्मचारी इंटरनल सिस्टम के माध्यम से यूज़र मैसेज देख सकते हैं।
वादी पक्ष का कहना है कि यह पहुंच सिर्फ मेटाडाटा तक सीमित नहीं है, बल्कि रियल-टाइम मैसेज कंटेंट तक भी बनाई जा सकती है। ये आरोप कथित व्हिसलब्लोअर्स से मिली जानकारियों पर आधारित बताए जा रहे हैं।
Meta का पुराना प्राइवेसी रिकॉर्ड भी कटघरे में
मुकदमे में Meta के पुराने प्राइवेसी विवादों का भी जिक्र किया गया है। इसमें Cambridge Analytica स्कैंडल का हवाला दिया गया है, जिसके चलते 2019 में कंपनी पर 5 बिलियन डॉलर का जुर्माना लगा था। इसके अलावा, यूरोप में GDPR उल्लंघन के मामले में Meta पर 1.2 बिलियन यूरो का भारी जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
WhatsApp का जवाब
इन गंभीर आरोपों पर वॉट्सऐप प्रमुख Will Cathcart ने साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वॉट्सऐप किसी भी यूज़र के मैसेज नहीं पढ़ सकता, क्योंकि Encryption Keys केवल यूज़र के फोन में होती हैं, कंपनी के सर्वर पर नहीं। उन्होंने इस मुकदमे को “बिना आधार का और सिर्फ सुर्खियां बटोरने वाला” बताया है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह केस भारत में भी खास महत्व रखता है। वॉट्सऐप ने IT Rules 2021 को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में दलील दी थी कि किसी मैसेज को ट्रेस करना Encryption तोड़ने के बराबर है। लेकिन अगर अमेरिकी अदालत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो वॉट्सऐप की यह दलील कमजोर पड़ सकती है।
इसके अलावा, अगर यह साबित होता है कि Meta ने बिना यूज़र की सहमति के मैसेज कंटेंट एक्सेस किया, तो कंपनी पर भारत के Digital Personal Data Protection Act, 2023 के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।
अब सबकी नजरें अमेरिकी कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो वॉट्सऐप की प्राइवेसी और Encryption से जुड़े दावों की असलियत सामने ला सकता है।
