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FII की बड़ी बिकवाली से टूटा बाजार, क्या यह गिरावट की शुरुआत है?

 
FII की बड़ी बिकवाली से टूटा बाजार, क्या यह गिरावट की शुरुआत है?
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Mumbai : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जोरदार गिरावट देखी गई। तीन दिनों की लगातार तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक तनाव के कारण भारी बिकवाली हुई। बीएसई सेंसेक्स इंट्रा-डे में 1,579 अंक तक फिसला और अंत में 1,048 अंक (1.25%) की गिरावट के साथ 82,498 के स्तर पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 50 भी लगभग 400 अंक (1.55%) टूटकर 25,454 पर बंद हुआ।

बाजार की इस गिरावट से निवेशकों को करीब 7.55 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बीएसई पर कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 464 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया।

गिरावट के प्रमुख कारण  

1. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव 

ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 7% से अधिक उछलकर 82.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं, जो कई महीनों का उच्च स्तर है। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, पेंट कंपनियों और एविएशन सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ा।

2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली  

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 27 फरवरी को एक ही दिन में 7,536.36 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। FII की लगातार निकासी से बाजार को सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है।

3. India VIX में तेज उछाल  

बाजार की घबराहट वोलैटिलिटी इंडेक्स में भी दिखी। India VIX 15% उछलकर 15.78 पर पहुंच गया। इससे पता चलता है कि निवेशक आने वाले दिनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं।

4. रुपये पर दबाव 

मुद्रा बाजार में भी कमजोरी देखी गई। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 91.23 के स्तर पर खुला। इससे पहले शुक्रवार को यह 17 पैसे की गिरावट के साथ 91.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये की कमजोरी की मुख्य वजहें—कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, FII की बिकवाली और सुरक्षित निवेश की ओर वैश्विक झुकाव हैं।

सेक्टरों में हाल  

- बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी सेक्टरों में भारी बिकवाली देखी गई।  

- आईटी सेक्टर से कुछ सहारा मिला, इंफोसिस और टीसीएस में मामूली तेजी रही।  

आगे क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है, तो बाजार में रिकवरी संभव है। अन्यथा गिरावट का दौर जारी रह सकता है।