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तीन दोस्तों ने 2015 में शुरू किया था छोटा सा आइडिया, आज 9,200 करोड़ की कंपनी कैसे बन गया रैपिडो

 
तीन दोस्तों ने 2015 में शुरू किया था छोटा सा आइडिया, आज 9,200 करोड़ की कंपनी कैसे बन गया रैपिडो
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New Delhi : भारत में बाइक टैक्सी और राइड बुकिंग की बात हो तो रैपिडो (Rapido) का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आज यह कंपनी देश के कई शहरों में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की सुविधा देती है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि रैपिडो की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे कौन लोग हैं।

तीन दोस्तों ने 2015 में शुरू की कंपनी

रैपिडो की शुरुआत साल 2015 में तीन दोस्तों—अरविंद सांका, पवन गुंटुपल्ली और ऋषिकेश एसआर ने मिलकर की थी। कंपनी का संचालन Roppen Transportation Services Pvt. Ltd. के जरिए होता है। अरविंद सांका कंपनी के सह-संस्थापक होने के साथ-साथ इसके CEO भी हैं।

ट्रैफिक की समस्या से आया बाइक टैक्सी का आइडिया

कंपनी की शुरुआत लोगों को बेहतर और सुविधाजनक परिवहन सेवा देने के उद्देश्य से हुई थी। संस्थापकों ने महसूस किया कि बड़े शहरों में बढ़ते ट्रैफिक के कारण लोगों को कम समय और कम खर्च में सफर करने के विकल्प की जरूरत है।

इसी सोच के साथ बाइक टैक्सी का आइडिया सामने आया। बाइक कार की तुलना में कम खर्चीली होती है और ट्रैफिक के बीच आसानी से निकल सकती है। रैपिडो ने इसी मॉडल पर अपना कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे यह सेवा लोगों के बीच लोकप्रिय होती चली गई।

समय के साथ कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया और कैब यानी कार टैक्सी सर्विस पर भी फोकस बढ़ाया।

रैपिडो में किसकी हिस्सेदारी?

रैपिडो के संस्थापकों के अलावा कंपनी में कई बड़े निवेशकों ने भी निवेश किया है। इनमें WestBridge Capital और Nexus Venture Partners जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

कंपनी के कारोबार को बढ़ाने और मार्केटिंग पर भी काफी खर्च किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, रैपिडो का सालाना ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब 600 से 700 करोड़ रुपये के बीच रहा है, जबकि कंपनी को करीब 350 से 370 करोड़ रुपये का घाटा भी हुआ था।

कितनी है रैपिडो की वैल्यूएशन?

रैपिडो की वैल्यूएशन करीब 1.1 अरब डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में 9,200 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। इस वैल्यूएशन के साथ कंपनी यूनिकॉर्न स्टार्टअप की श्रेणी में शामिल हो चुकी है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि कंपनी की वैल्यूएशन और उसके संस्थापकों की व्यक्तिगत नेटवर्थ अलग-अलग चीजें हैं। कंपनी की वैल्यूएशन से सीधे यह तय नहीं होता कि उसके संस्थापक व्यक्तिगत रूप से कितने संपन्न हैं।