रेलवे स्टेशन पर खोलना चाहते हैं अपनी दुकान? जानिए आवेदन का तरीका, खर्च, लाइसेंस और जरूरी नियम
नई दिल्ली। अगर आप भारतीय रेलवे स्टेशन पर अपनी दुकान खोलने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। रेलवे स्टेशनों पर फूड स्टॉल, चाय-कॉफी कियोस्क, बुक स्टॉल, जनरल स्टोर और अन्य दुकानों के लिए समय-समय पर टेंडर जारी किए जाते हैं। हालांकि, दुकान लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
टेंडर के जरिए मिलता है मौका
भारतीय रेलवे और IRCTC स्टेशनों पर विभिन्न प्रकार की दुकानों के लिए ओपन टेंडर या ई-ऑक्शन के माध्यम से लाइसेंस जारी करते हैं। इच्छुक आवेदक रेलवे के ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (REPS) पर जारी टेंडरों की जानकारी प्राप्त कर आवेदन कर सकते हैं।
ऐसे करें आवेदन
रेलवे स्टेशन पर दुकान के लिए आवेदन करने के लिए सबसे पहले REPS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) बनवाना जरूरी है। फिर अपनी पसंद के स्टेशन का टेंडर खोजकर उससे जुड़े दस्तावेज डाउनलोड करें। निर्धारित EMD (Earnest Money Deposit) और अन्य आवश्यक शुल्क जमा करने के बाद तकनीकी और वित्तीय बोली (Technical & Financial Bid) दाखिल करनी होती है। सभी प्रक्रियाओं के बाद पात्रता और बोली के आधार पर लाइसेंस आवंटित किया जाता है।
कितनी आ सकती है लागत?
रिपोर्ट्स के अनुसार, रेलवे स्टेशन पर दुकान शुरू करने में शुरुआती खर्च लगभग 40 हजार रुपये से 3 लाख रुपये तक हो सकता है। यह राशि स्टेशन के आकार, स्थान और दुकान की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
ब्रांड की फ्रेंचाइजी से भी मिल सकता है मौका
कुछ मामलों में रेलवे स्टेशन पर पहले से मौजूद ब्रांड, जैसे अमूल, मदर डेयरी, हल्दीराम और अन्य फूड कंपनियां अपने फ्रेंचाइजी पार्टनर नियुक्त करती हैं। ऐसे में सीधे रेलवे से टेंडर लेने की बजाय संबंधित ब्रांड के साथ समझौता करना होता है। हालांकि अंतिम अनुमति रेलवे और IRCTC के नियमों के अनुसार ही दी जाती है।
कितने समय के लिए मिलता है लाइसेंस?
IRCTC के नियमों के मुताबिक, फूड प्लाजा का लाइसेंस आमतौर पर 9 वर्षों के लिए दिया जाता है। वहीं छोटे खानपान स्टॉल, चाय-कॉफी कियोस्क और अन्य कैटरिंग इकाइयों के लाइसेंस की वैधता 5 वर्ष तक हो सकती है।
किन कारणों से रद्द हो सकता है आवेदन?
यदि आवेदन में PAN, GST, आधार, फर्म रजिस्ट्रेशन या बैंक विवरण गलत पाए जाते हैं, तो आवेदन निरस्त किया जा सकता है। इसके अलावा कई टेंडरों में न्यूनतम टर्नओवर, कार्य अनुभव और वित्तीय क्षमता जैसी शर्तें भी अनिवार्य होती हैं। इन शर्तों को पूरा न करने पर तकनीकी बोली में ही आवेदन खारिज हो सकता है।
इसके अलावा EMD जमा करने में गलती, टेंडर फॉर्म में तकनीकी त्रुटियां, नियमों का उल्लंघन, एक से अधिक दुकानों के लिए गलत तरीके से आवेदन या किसी कानूनी विवाद की स्थिति में भी आवेदन रद्द किया जा सकता है। लाइसेंस देने या आवेदन निरस्त करने का अंतिम निर्णय भारतीय रेलवे और IRCTC के नियमों के अनुसार लिया जाता है।
