एथेनॉल उत्पादन की बढ़ती रफ्तार पर पानी का संकट! 1 लीटर ईंधन बनाने में खर्च हो रहे 10 हजार लीटर तक पानी
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। हालांकि एथेनॉल उत्पादन के विस्तार के साथ पानी की खपत को लेकर गंभीर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन का वास्तविक जल पदचिह्न (वॉटर फुटप्रिंट) काफी बड़ा है, क्योंकि इसकी अधिकांश पानी की जरूरत उन फसलों की खेती में होती है जिनसे एथेनॉल तैयार किया जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, 1 लीटर एथेनॉल के उत्पादन में 2800 से 10790 लीटर तक पानी की खपत हो सकती है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि एथेनॉल किस फसल से तैयार किया जा रहा है।
चावल से एथेनॉल उत्पादन में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत
एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल में चावल सबसे अधिक पानी खर्च करने वाली फसल है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 लीटर एथेनॉल तैयार करने में लगभग 10790 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसके लिए करीब 2.5 से 3 किलोग्राम चावल का उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि चावल आधारित एथेनॉल को जल संसाधनों पर सबसे अधिक दबाव डालने वाला विकल्प माना जाता है।
मक्के से एथेनॉल उत्पादन भी कम नहीं
भारत के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में मक्का एक महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में उभरकर सामने आया है। हालांकि मक्के से 1 लीटर एथेनॉल तैयार करने में भी लगभग 4670 लीटर पानी की खपत होती है। यह मात्रा चावल की तुलना में कम जरूर है, लेकिन जल उपयोग के लिहाज से अभी भी काफी अधिक मानी जाती है।
गन्ने से बनने वाला एथेनॉल अपेक्षाकृत बेहतर
गन्ना भारत में एथेनॉल उत्पादन का पारंपरिक स्रोत रहा है। विभिन्न किस्मों, जलवायु और खेती के क्षेत्रों के अनुसार 1 लीटर एथेनॉल उत्पादन के लिए 2860 से 3630 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस लिहाज से गन्ना, चावल की तुलना में कम पानी खर्च करने वाला विकल्प माना जाता है।
फैक्ट्री नहीं, खेती में खर्च होता है अधिकांश पानी
आम धारणा है कि एथेनॉल फैक्ट्रियां उत्पादन प्रक्रिया में भारी मात्रा में पानी खर्च करती हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। डिस्टिलरी प्लांट में 1 लीटर एथेनॉल तैयार करने के लिए सीधे तौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। कुल पानी की खपत का अधिकांश हिस्सा फसलों की खेती और सिंचाई में ही खर्च हो जाता है।
क्या है वर्चुअल वॉटर?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी फसल को उगाने में उपयोग होने वाले कुल पानी को 'वर्चुअल वॉटर' कहा जाता है। इसमें सिंचाई का पानी, मिट्टी की नमी और बारिश से प्राप्त जल भी शामिल होता है। इसी आधार पर एथेनॉल का वास्तविक वॉटर फुटप्रिंट निर्धारित किया जाता है।
भूजल पर बढ़ सकता है दबाव
पर्यावरण विशेषज्ञों और नीति आयोग समेत कई संस्थानों ने चेतावनी दी है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक पानी मांगने वाली फसलों की खेती बढ़ने से भूजल संसाधनों पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। देश के कई राज्यों में पहले से ही भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में चावल और गन्ने जैसी फसलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन की दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
