Movie prime

नए लेबर कोड से क्यों बढ़ा IT कंपनियों का खर्च? जानिए पूरा गणित

 
नए लेबर कोड से क्यों बढ़ा IT कंपनियों का खर्च? जानिए पूरा गणित
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

New Delhi/Bengaluru : भारत की तीन सबसे बड़ी आईटी कंपनियों—टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस और HCLTech—को नए लेबर कोड लागू होने के कारण तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में कुल 4,373 करोड़ रुपये से अधिक का विशेष खर्च (exceptional charge) उठाना पड़ा। इस खर्च के चलते इन कंपनियों के मुनाफे में भारी गिरावट आई है। नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी, छुट्टियां (leave liability) और अन्य कर्मचारी लाभों में बढ़ोतरी के कारण यह अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

कंपनियों के विशेष खर्च का ब्योरा

- TCS : 2,128 करोड़ रुपये का विशेष खर्च
- इंफोसिस : 1,289 करोड़ रुपये का विशेष खर्च
- HCLTech : 956 करोड़ रुपये का विशेष खर्च

कुल मिलाकर तीनों कंपनियों पर 4,373 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। यह खर्च मुख्य रूप से नए लेबर कोड के तहत ग्रेच्युटी और छुट्टियों के बढ़ते दायित्व (liability) के कारण है।

ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर

नए लेबर कोड से लागत बढ़ने के बावजूद TCS ने अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को 25.2 प्रतिशत पर बनाए रखा। HCLTech ने मार्जिन को बढ़ाकर 18.6 प्रतिशत कर लिया। वहीं इंफोसिस का ऑपरेटिंग मार्जिन पिछली तिमाही के 21 प्रतिशत से गिरकर 18.4 प्रतिशत रह गया। इंफोसिस ने स्पष्ट किया कि अगर लेबर कोड से जुड़ा खर्च नहीं होता, तो एडजस्टेड मार्जिन 21.2 प्रतिशत के आसपास रहता।

ऑपरेटिंग मार्जिन क्या है?

ऑपरेटिंग मार्जिन कंपनी के कोर बिजनेस से होने वाले मुनाफे को मापता है। इसमें कर्मचारियों की सैलरी, रॉ मटेरियल और अन्य परिचालन खर्च शामिल होते हैं। यह टैक्स चुकाने से पहले का प्रॉफिट होता है। ज्यादा ऑपरेटिंग मार्जिन का मतलब है कि कंपनी अपनी बिक्री से अधिक मुनाफा कमा रही है, जिसका इस्तेमाल कर्ज चुकाने, डिविडेंड देने या ग्रोथ में किया जा सकता है।

नए लेबर कोड के प्रमुख बदलाव

नवंबर 2025 में लागू हुए चार नए लेबर कोड ने भारत के वर्कफोर्स के लिए कई सुधार किए हैं। इनमें 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए कानून लागू किए गए। प्रमुख बदलाव:
- अनिवार्य अपॉइंटमेंट लेटर
- ज्यादा बेसिक सैलरी
- काम के घंटों के आधार पर गारंटीड सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स
- महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति (जिससे ज्यादा कमाई का मौका)

इन बदलावों से आईटी/आईटीईएस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं और ग्रेच्युटी-लीव जैसे लाभ पहले से ही अच्छे स्तर पर थे।

कंपनियों का भविष्य का अनुमान

तीनों कंपनियों ने कहा है कि नए लेबर कोड का अगले क्वार्टर में मार्जिन पर बहुत कम असर पड़ेगा। मैनेजमेंट को 10-20 बीपीएस (बेसिस पॉइंट्स) के असर की उम्मीद है। यानी लागत बढ़ने के बावजूद कंपनियां इसे मैनेज करने में सक्षम हैं।

बाजार का रिएक्शन

नए लेबर कोड से जुड़े खर्च की वजह से TCS, Infosys और HCLTech के शेयरों में शुरुआती गिरावट देखी गई, लेकिन बाद में निवेशकों ने इसे एक बार का खर्च मानकर रिकवरी दिखाई। विश्लेषकों का कहना है कि लंबे समय में यह बदलाव कर्मचारी संतुष्टि बढ़ाएगा और टैलेंट रिटेंशन में मदद करेगा।

नए लेबर कोड से आईटी सेक्टर पर तात्कालिक दबाव तो पड़ा है, लेकिन यह श्रम सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। कंपनियां इसे मैनेज करने में सक्षम दिख रही हैं।