वाराणसी के 11 जाम वाले रूट पुलिस की रडार पर, DGP राजीव कृष्ण ने बताया कैसे मिलेगी ट्रैफिक से राहत
वाराणसी दौरे पर डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि शहर के 11 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर AI आधारित निगरानी में हैं। जाम कम करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ितों का पैसा सुरक्षित रखने की नई व्यवस्था विकसित की जा रही है।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने रविवार को वाराणसी पुलिस लाइंस सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि प्रदेश सरकार अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ ट्रैफिक प्रबंधन में तकनीक आधारित सुधारों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी के 11 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर और संवेदनशील मार्गों को चिन्हित कर उनकी लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे शहर को जाम की समस्या से राहत दिलाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
AI तकनीक से ट्रैफिक प्रबंधन को मिल रही मजबूती
डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि प्रदेश के 20 जिलों में "रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन" योजना लागू की गई है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल डेटा एनालिसिस की मदद से यातायात व्यवस्था का अध्ययन किया जा रहा है। वाराणसी में 11 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जहां जाम की स्थिति, वाहनों की गति, यात्रा समय और ट्रैफिक दबाव का नियमित विश्लेषण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि चोक प्वाइंट की पहचान कर वहां सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। भविष्य में रोपवे जैसी परियोजनाएं भी शहर में यातायात का दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर विशेष फोकस
डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश पुलिस अपराध और अपराधियों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर कार्य कर रही है। पिछले वर्षों में प्रमुख अपराधों में कमी दर्ज की गई है और महिलाओं, व्यापारियों तथा आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत हुआ है।
उन्होंने बताया कि वाराणसी दौरे के दौरान अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग और जनपदीय मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
साइबर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
साइबर अपराध को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए डीजीपी ने कहा कि डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के मामलों में भी वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश पुलिस इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीक आधारित तंत्र विकसित कर रही है।
उन्होंने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों का पैसा बैंक स्तर पर ही रोकने की व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि धन विदेशों तक न पहुंच सके। साथ ही विभिन्न देशों के साथ हुए सहयोग समझौतों के आधार पर विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
गांव और मोहल्ला स्तर के बदमाश भी पुलिस के रडार पर
माफियाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने कहा कि बड़े अपराधियों के साथ-साथ गांव, कस्बों और मोहल्लों में सक्रिय बदमाशों और असामाजिक तत्वों को भी चिन्हित किया जा रहा है। इंटरनेट मीडिया और तकनीकी माध्यमों की मदद से ऐसे लोगों पर निगरानी रखी जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की नियमित समीक्षा
काशी विश्वनाथ धाम सहित प्रदेश के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डीजीपी ने कहा कि सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा की जाती है। इसके लिए स्थायी समितियां गठित हैं, जो समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्थाओं का आकलन कर आवश्यक सुझाव देती हैं।
अयोध्या मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है और वर्तमान में एसआईटी जांच जारी है।
60,244 नए पुलिसकर्मी जल्द संभालेंगे जिम्मेदारी
डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि हाल ही में भर्ती किए गए 60,244 पुलिसकर्मी विभिन्न जनपदों में पहुंच चुके हैं और उनका प्रशिक्षण जारी है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें नियमित पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन में तैनात किया जाएगा, जिससे पुलिस बल की कार्यक्षमता और अधिक मजबूत होगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि तकनीक, अतिरिक्त पुलिस बल और बेहतर समन्वय के माध्यम से वाराणसी सहित पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
