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काशी में 527 करोड़ से 13 पुराने वार्डों में 200 किमी नई सीवर लाइन, ओवरफ्लो की समस्या होगी खत्म
 

 
 काशी में 527 करोड़ से 13 पुराने वार्डों में 200 किमी नई सीवर लाइन, ओवरफ्लो की समस्या होगी खत्म
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वाराणसी I काशी की सदियों पुरानी सीवर व्यवस्था में सुधार के लिए शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 527 करोड़ रुपये की लागत से शहर के 13 पुराने वार्डों में लगभग 200 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाने को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना से वर्षों से सीवर ओवरफ्लो, जाम और जलभराव की समस्या से जूझ रहे पुराने मोहल्लों के निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि शुरू में 18 पुराने वार्डों के लिए विस्तृत प्रस्ताव (डीपीआर) तैयार किया गया था, जिसमें से 13 वार्डों को स्वीकृति मिल चुकी है। शेष 5 वार्डों के प्रस्ताव पर भी इसी सप्ताह कैबिनेट से मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके बाद इन क्षेत्रों में भी काम तुरंत शुरू हो जाएगा।

इस परियोजना से हुकूलगंज, नई बस्ती, प्रहलाद घाट, कृतिवाशेश्वर, शिवपुरवा, तुलसीपुर, बिरदोपुर, काजीपुरा, शिवाला, नगवां, बागाहाड़ा, जंगमबाड़ी और बंगाली टोला जैसे इलाकों सहित करीब 100 मोहल्लों के चार लाख से अधिक नागरिक सीधे लाभान्वित होंगे। खास बात यह है कि निर्माण कार्य ट्रेंचलेस (ट्रेंचलेस) तकनीक से किया जाएगा, जिससे गलियों में खुदाई न्यूनतम होगी और आम जनजीवन पर असर कम पड़ेगा। गली के मोड़ों पर छोटे गड्ढे खोदकर पूरी गली में नई पाइपलाइन डाली जाएगी।

वाराणसी की मौजूदा जलनिकासी व्यवस्था मुख्य रूप से 200 वर्ष पुराने शाही नालों और ब्रिटिश कालीन ईंटों से बने ड्रेनेज सिस्टम पर टिकी हुई है। खासकर गंगा घाटों से सटे इलाकों में बार-बार जाम और ओवरफ्लो की समस्या बनी रहती है। नगर निगम ने जल निगम के माध्यम से इन क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराकर डीपीआर तैयार की और शासन को भेजा, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

महापौर अशोक कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि 18 पुराने वार्डों में सीवर लाइन के साथ-साथ पेयजल पाइपलाइन को भी बदलने का प्रस्ताव शामिल है। इससे भविष्य में बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी और शहरवासियों को अतिरिक्त परेशानी से बचाया जा सकेगा।

यह परियोजना काशी की आधारभूत संरचना को मजबूत करने और पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होगी। कार्य शुरू होने पर शहर की साफ-सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।