साइबर मामलों में ढिलाई पर चला कमिश्नर का डंडा, वाराणसी में 4 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, 2 निलंबित
वाराणसी में साइबर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बड़ा एक्शन लिया है। समीक्षा बैठक में 4 उपनिरीक्षकों को लाइन हाजिर और 2 विवेचकों को निलंबित किया गया। बैठक में 6 करोड़ रुपये की साइबर ठगी रोकने और म्यूल अकाउंट पर सख्ती के निर्देश भी दिए गए।
वाराणसी। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर सेल और सभी थानों के साइबर हेल्प डेस्क की समीक्षा बैठक में काम संतोषजनक नहीं मिलने पर चार उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया गया, जबकि 60 दिनों से अधिक समय तक विवेचनाएं लंबित रखने वाले दो विवेचकों को निलंबित कर दिया गया।
बैठक में पुलिस कमिश्नर ने साफ कहा कि साइबर अपराधों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर शिकायत का समय पर निस्तारण और साइबर अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साइबर शिकायतों की समीक्षा में सामने आई लापरवाही
24 जून को आयोजित समीक्षा बैठक में पुलिस कमिश्नर ने कमिश्नरेट के सभी थानों के साइबर हेल्प डेस्क की कार्यप्रणाली की विस्तार से समीक्षा की। कई थानों में शिकायतों के निस्तारण की रफ्तार धीमी मिलने और अपेक्षित प्रगति नहीं दिखने पर उन्होंने मौके पर ही कार्रवाई के आदेश दिए।
लापरवाही के चलते कोतवाली के उपनिरीक्षक विजय कुमार यादव, आदमपुर के सौरभ कुमार, शिवपुर के पवन जायसवाल और जंसा के तबीज खान को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया गया।
इसके अलावा सिंधौरा के उपनिरीक्षक रोहित कुमार और लोहता के उपनिरीक्षक ऋतुराज मिश्रा को 60 दिनों से अधिक समय तक विवेचनाएं लंबित रखने के कारण निलंबित कर दिया गया।
म्यूल अकाउंट और फर्जी बैंक खातों पर सख्ती के निर्देश
बैठक में पुलिस कमिश्नर ने साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए बैंक खातों, म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम कार्ड और संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ तेज कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है।
6 करोड़ रुपये की साइबर ठगी रोकी
बैठक के दौरान साइबर सेल की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से 20 जून 2026 के बीच साइबर ठगी के मामलों में करीब 6 करोड़ रुपये की रकम होल्ड और फ्रीज कराकर पीड़ितों को राहत दिलाई गई।
इसके अलावा वर्ष 2026 में अब तक साइबर अपराध में इस्तेमाल किए गए 3198 मोबाइल नंबर ब्लॉक किए गए हैं, जबकि 509 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी डिएक्टिवेट किए जा चुके हैं।
76 प्रतिशत शिकायतों का हुआ निस्तारण
समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि साइबर शिकायतों का डिस्पोजल रेट 76 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। पुलिस कमिश्नर ने इस उपलब्धि पर अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि इसे और बेहतर बनाने की जरूरत है।
उन्होंने सभी साइबर हेल्प डेस्क प्रभारियों को निर्देश दिया कि हर शिकायत पर तेजी से कार्रवाई हो और पीड़ित को समय पर राहत मिले।
अब सिर्फ 14 मिनट में शुरू हो रही कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पहले की तुलना में साइबर शिकायतों पर कार्रवाई शुरू करने का समय काफी कम हुआ है। अब शिकायत मिलने के बाद औसतन 14 मिनट के भीतर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
पुलिस कमिश्नर ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए इस व्यवस्था को लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए।
प्रतिबिंब पोर्टल और साइबर जागरूकता अभियान पर भी जोर
बैठक में प्रतिबिंब और समन्वय पोर्टल की प्रभावी मॉनिटरिंग, IMEI और मोबाइल नंबर ब्लॉकिंग, फर्जी POS मशीनों के खिलाफ कार्रवाई और आम लोगों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। इसलिए लोगों को लगातार जागरूक करना बेहद जरूरी है। बैठक में पुलिस उपायुक्त अपराध नीतू, अपर पुलिस उपायुक्त साइबर अपराध नृपेन्द्र सिंह सहित साइबर सेल और विभिन्न थानों के अधिकारी मौजूद रहे।
