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मणिकर्णिका घाट के धुएं से मिलेगी राहत: श्री काशी विश्वनाथ धाम में लगेगी 58 अत्याधुनिक एयर प्यूरीफिकेशन यूनिट
 

 
मणिकर्णिका घाट के धुएं से मिलेगी राहत: श्री काशी विश्वनाथ धाम में लगेगी 58 अत्याधुनिक एयर प्यूरीफिकेशन यूनिट
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वाराणसी। बाबा दरबार में उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और पास स्थित मणिकर्णिका घाट से उठने वाले धुएं के कारण उत्पन्न वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की गई है। जिंदल स्टेनलेस ने श्री काशी विश्वनाथ धाम (एसकेवीडी) के रैम्प भवन में स्वदेशी उन्नत एयर प्यूरीफिकेशन प्रणाली स्थापित करने के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया है।

यह परियोजना ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को भी कवर करेगी। ‘संजीवन’ नामक इस पहल का अर्थ है ‘जीवन को पुनर्स्थापित करना’। यह जिंदल स्टेनलेस की अब तक की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) परियोजना है। इसे अमीदा क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से लागू किया जा रहा है, जिसमें कंपनी की नवीन परिवेशीय वायु शुद्धिकरण तकनीक का उपयोग होगा।

यह पहल पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य शहर, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ और स्वस्थ वायु सुनिश्चित करना है। इस परियोजना को श्री काशी विश्वनाथ धाम प्राधिकरण से स्वीकृति मिल चुकी है।

परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार स्थल के निकट स्थित एसकेवीडी परिसर के रैम्प भवन में विशेष वायु शोधन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य जलती चिताओं से निकलने वाले धुएं और प्रदूषक तत्वों को नियंत्रित करना है, ताकि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बेहतर हो सके।

इसमें अमीदा की अट्रेक्ट-कैप्चर-एलिमिनेट (एसीई+) तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसे नीति आयोग सहित प्रमुख सरकारी संस्थानों द्वारा परीक्षण और अनुमोदन प्राप्त है। यह प्रणाली हवा में मौजूद प्रदूषकों को आकर्षित कर उन्हें पकड़ने और निष्क्रिय करने के सिद्धांत पर काम करती है।

यह तकनीक नैनो ब्लैक कार्बन, पोलेन और जैविक कणों को प्रभावी रूप से नष्ट करने के साथ-साथ सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों और वायरस-बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों को भी निष्क्रिय करने में सक्षम है। परियोजना के अंतर्गत स्टेनलेस स्टील की 58 वायु शुद्धिकरण इकाइयाँ लगाई जाएंगी, जिनकी संयुक्त क्षमता प्रति घंटे 3 लाख घन मीटर से अधिक वायु शुद्ध करने की होगी।

जिंदल स्टेनलेस ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कंपनी का उद्देश्य स्थानीय निवासियों और लाखों श्रद्धालुओं को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है। वहीं, अमीदा क्लीनटेक ने भी स्वच्छ और सतत वायु के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शक सिद्धांत “द एयर यू ब्रीद” है, जिसके तहत वे बढ़ते वायु प्रदूषण और उसके सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए नवाचार कर रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन ने पर्यावरण सुधार और जनस्वास्थ्य के हित में किए जा रहे इस प्रयास की सराहना की है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह पहल न केवल मणिकर्णिका घाट से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करेगी, बल्कि मंदिर के मुख्य गलियारे तक पहुंचने वाले प्रदूषित कणों को भी कम करेगी, जिससे तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं और पुजारियों को अधिक स्वच्छ हवा मिल सकेगी।