काशी में सजेगा संस्कृति और सनातन का महाकुंभ, 7 हजार जेन-जी और 3 हजार संत होंगे शामिल!
वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में आयोजित होने वाली संस्कृति संसद में इस बार युवाओं की भागीदारी खास रहने वाली है। आयोजन में देशभर से सात हजार से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया है। जेन-जी कॉन्क्लेव में 90 फीसदी वक्ता युवा होंगे, जबकि 10 फीसदी विशेषज्ञ और मार्गदर्शक के रूप में अपनी भूमिका निभाएंगे। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और समकालीन विषयों पर खुलकर विचार रखने का अवसर देना है।
कॉन्क्लेव में युवाओं को सिर्फ वक्ताओं को सुनने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि वे सवाल पूछने और अपने विचार साझा करने में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। इसके साथ ही मनुस्मृति से जुड़े विवादों पर चर्चा के लिए समिति गठित करने और हिंदू आचार संहिता तैयार करने की योजना भी है। इन विषयों पर विचार-विमर्श के जरिए अलग-अलग दृष्टिकोण सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
कार्यक्रम में पद्मश्री स्वामी प्रदीप्तानंद, विष्णु शंकर जैन, महंत रवीन्द्र पुरी महाराज, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी चिदानंद सरस्वती, स्वामी ब्रह्मेशानंदाचार्य, मिलिंद परांडे और आलोक कुमार समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी।
संस्कृति उत्सव में दिखेगी भारत की विविधता
संस्कृति संसद के दौरान विचार-विमर्श के साथ भारतीय कला और परंपराओं का भी अनूठा संगम देखने को मिलेगा। आयोजन के तहत प्रतिदिन शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक कलाओं की प्रस्तुतियां होंगी।
बनारस के स्थानीय कलाकारों के साथ पुडुचेरी की मार्शल आर्ट्स टीम भी अपनी कला का प्रदर्शन करेगी। वहीं, राष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रदर्शनी में देश-विदेश के कलाकार भारतीय सभ्यता, तीर्थस्थलों और सांस्कृतिक विरासत को अपनी कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।
इसके अलावा रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों और युवाओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
काशी विश्वनाथ धाम में होगा महारुद्राभिषेक
संस्कृति संसद के मुख्य आयोजन से पहले दो नवंबर को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में संत-महात्मा बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक करेंगे। इस धार्मिक आयोजन के साथ संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत होगी।
वहीं, संस्कृति संसद और राज्य ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय चित्रकला शिविर में भी देश-विदेश के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। शिविर के दूसरे दिन 50 चित्रकारों के साथ बीएचयू, काशी विद्यापीठ समेत सात कॉलेजों के 40 से अधिक जेन-जी और जेन-अल्फा प्रतिभागियों ने चित्र बनाए।
इस शिविर में पद्मश्री दुलारी देवी, श्याम शर्मा, अद्वैत गडनायक, राजेश यादव और श्रीलंका की सहाना इहतिसाम समेत कई कलाकारों ने हिस्सा लिया। मॉरीशस और बांग्लादेश के कलाकारों की भागीदारी ने भी आयोजन को अंतरराष्ट्रीय रंग दिया।
कुल मिलाकर, संस्कृति संसद में आध्यात्मिक परंपराओं, भारतीय कला और नई पीढ़ी के विचारों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी, संतों का मार्गदर्शन और देश-विदेश के कलाकारों की प्रस्तुतियां इस आयोजन को खास बनाएंगी।
