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काशी के दवा और साड़ी कारोबारियों को मिलेगा नया हब, 145 करोड़ की लागत से बनेगा 6 मंजिला 'नमो बनारस केंद्र'

 
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वाराणसी: काशी के विकास को नई रफ्तार देने के लिए नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। मेयर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में ‘नमो बनारस केंद्र’ के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के तहत 145 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जिसमें कुल 844 दुकानें होंगी।

यह कॉम्प्लेक्स सप्तसागर दवा मंडी के व्यापारियों और बनारसी साड़ी कारोबारियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, 0.82 हेक्टेयर भूमि पर जी+6 (छह मंजिला) भवन का निर्माण होगा, जिसका कुल क्षेत्रफल 48,365 वर्ग मीटर होगा। इसे एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

व्यापारियों को मिलेगा सीधा लाभ

सप्तसागर क्षेत्र में करीब 532 दवा व्यापारी और 800 से अधिक साड़ी कारोबारी सक्रिय हैं, जबकि जिले में लगभग 10 हजार बुनकर जुड़े हुए हैं। इस योजना से इन सभी को आधुनिक व्यापारिक सुविधाएं मिलेंगी।

फंडिंग का प्लान तैयार

परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये व्यापारियों से जुटाए जाएंगे, जबकि 45 करोड़ रुपये राज्य वित्त आयोग के अनुदान से लिए जाएंगे।

होम स्टे और पीजी के लिए लाइसेंस शुल्क तय

नगर निगम ने होम स्टे और पेइंग गेस्ट हाउस के लिए 1500 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क को भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा मैदागिन स्थित पेट्रोल पंप के पट्टे का नवीनीकरण करते हुए 55 हजार रुपये मासिक किराया तय किया गया है।

स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त वाई-फाई

स्मार्ट सिटी के तहत बीएचयू ट्रॉमा सेंटर, बीएचयू अस्पताल और कैंसर अस्पताल में जल्द ही मुफ्त वाई-फाई सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

बिजली व्यवस्था में सुधार

सलारपुर और पहाड़िया में नए बिजली उपकेंद्र बनाने की मंजूरी भी दी गई है। इससे आसपास के इलाकों में लो-वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

अतिक्रमण पर सख्ती और वाहनों की नीलामी

शहर में अतिक्रमण रोकने के लिए प्रवर्तन दल को और मजबूत किया जाएगा। वहीं, 83 अनुपयोगी वाहनों की नीलामी का भी फैसला लिया गया है, हालांकि कुछ वाहनों की नीलामी फिलहाल रोक दी गई है।

बैठक बीच में ही स्थगित

बैठक के दौरान अव्यवस्था को लेकर मेयर ने नाराजगी जताई और बैठक को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया। इस वजह से कई जनहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।

नगर निगम का यह कदम काशी के व्यापार, आधारभूत ढांचे और स्मार्ट सिटी विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।